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छात्र हर्षित और उनकी टीम ब्लड डोनेशन के प्रति कर रही जागरुक, 501 यूनिट रक्तदान का बनाया रिकॉर्ड

Fri, 14 Jun 2019 04:55 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 14 Jun 2019 04:55 PM IST
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रक्तदान के लिए जागरुक करते हर्षित और उनकी टीम - फोटो : amar ujala

हर साल लखनऊ में खून न मिलने से काफी लोगों की मौत हो जाती है। तलाशने पर रक्तदाता नहीं मिलते। कई रक्तदाता ऐसे हैं, जो रक्तदान करना चाहते हैं लेकिन वे जरूरतमंद तक नहीं पहुंच पाते हैं। इन समस्याओं के समाधान का बीड़ा उठाया है लखनऊ के एमिटी विश्वविद्यालय के बीटेक छात्र हर्षित और उनके साथियों ने।

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हर्षित और उनकी टीम ‘ब्लड कनेक्ट’ नाम से रक्तदान कैंप लगाते हैं। इस कैंप में वे रक्तदान करते हैं और लोगों को इसके लिए प्रेरित भी करते हैं। टीम का कहना है कि अगर लोग थोड़ा सा भी प्रयास करें तो फिर खून की कमी से किसी की जान नहीं जाएगी। हर्षित के साथ ही टीम में शाश्वत, प्रियांशी, शिवांग, कृतिका, श्रेया, पूजा शर्मा, तनुराग, प्राप्ति, शुभि, नेहा, पूजा पांडेय, अनिकेत, साहिल, सौम्या, अंशू, नितिन, दीपशी, गरिमा, श्वेता और विभूति शामिल हैं।
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ओ निगेटिव और एबी निगेटिव खून की कमी सबसे ज्यादा
टीम सदस्य बताते हैं कि अब तक के अनुभव के अनुसार ओ निगेटिव और एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप का खून मुश्किल से मिलता है। इसलिए इस ब्लड ग्रुप के लोगों को तैयार किया जाता है कि वे रक्तदान करें। लोगों में जागरूकता आ रही है, लेकिन अभी भी इसमें काफी काम करने की जरूरत है।

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गांवों में जागरूकता फैलाने की ज्यादा जरूरत

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प्रतीकात्मक तस्वीर

हर्षित ने बताया कि अभी भी लोगों में रक्तदान को लेकर गलतफहमी है। जानकारी न होने की वजह से लोग रक्तदान करने से डरते हैं। खासकर गांवों में यह स्थिति बहुत ही गंभीर है। ग्रामीणों का मानना है कि खून देने से कमजोरी आती है, उनकी इस भ्रांति को दूर करना सबसे बड़ी चुनौती है। हमारी टीम जब भी गांव में कैंप करती है तो ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों को रक्तदान के फायदे बताने की कोशिश करती हैं ताकि वो भी भविष्य के रक्तदाता बन सके।

हर्षित ने बताया कि वे पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर रक्तदान शिविर लगाते हैं। मार्च में सीतापुर में भी ऐसा ही एक कैंप लगाया था। इस कैंप में 501 यूनिट रक्तदान हुआ था। एक ही दिन में एक कैंप में रक्तदान के मामले में यह रिकॉर्ड है। इससे पहले बनारस में करीब चार सौ यूनिट रक्तदान एक ही कैंप में हुआ था।

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