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जमघट पर्व पर डिप्टी सीएम ने जमकर की पतंगबाजी, जानिए क्या है लखनऊ का पतंगबाजी कनेक्शन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 09 Nov 2018 04:53 PM IST
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परिवार संग पतंगबाजी करते डिप्टी सीएम
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गुरुवार को गोवर्धन पूजा और जमघट पर्व के अवसर पर डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने पतंगबाजी कर जमकर पेंच लड़ाये। इस अवसर पर उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। अपने ट्विटर अकाउंट पर इस अवसर की तस्वीरें साझा कर उन्होंने लोगों को दीपावली और भाई दूज की शुभकानाएं भी दी।
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पतंगबाजी और लखनऊ का काफी पुराना रिश्ता रहा है। पतंगबाजी को नवाबों का शौक कहा जाता है। कहा जाता है कि नवाबों के दौर में पतंगें दुल्हन की तरह सजायी जाती थीं, जिनमें अक्सर सोने और चांदी के तारों की झलझली बंधी होती थी। ये पतंगे जिसकी छत पर कट कर गिरती थीं। उसके घर उस दिन पुलाव बनता था।
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सन् 1857 में लखनऊ रेजीडेंसी के ब्रिटिश अधिकारियों ने एक पतंग के जरिए अपना गुप्त संदेश किला मच्छी भवन तक पहुंचाने में सफलता पाई थी। लखनऊ में दीवाली के दूसरे दिन होने वाला जमघट त्योहार पतंग के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पतंग से लखनऊ का आसमान रंगीन समंदर हो जाता है।
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ये हैं पुराने अड्डे
पतंगबाजी करते डिप्टी सीएम
वजीरबाग, डालीगंज, चौक ये कुछ ऐसे अड्डे हैं जहां आपको हर तरह के पतंग जैसे तावा, ढाया, तीन, चार पौनताई बनचों और पैसुल्ची मिल जाएंगे। लखनऊ में पतंग के टूर्नामेंट भी होते रहे हैं जिसमें बढ़-चढ़कर लोग हिस्सा लेते रहे हैं।
परिवार के साथ बैठे डिप्टी सीएम
लखनऊ की पतंगबाजी इसलिए भी अलग मानी जाती है क्योंकि यहां तवायफों ने भी पतंगबाजी का हुनर दिखाया है। इतिहासकार योगेश प्रवीण बताते हैं कि नक्खास की जली खुर्शीद बहुत लंबे पेंच लड़ाती थीं।
भले ही लखनऊ आधुनकिता के रंग में जीने लगा है लेकिन यहां के लोगों का इस पुरानी रवायत से मोह आज भी बरकरार है।
भले ही लखनऊ आधुनकिता के रंग में जीने लगा है लेकिन यहां के लोगों का इस पुरानी रवायत से मोह आज भी बरकरार है।