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26 रुपये में खरीदी थी 18 रुपये वाली कोरोना किट
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केजीएमयू में कोविड आरटीपीसीआर जांच किट की खरीद में धन का जमकर दुरुपयोग हुआ है। विश्वविद्यालय के पास पूरे प्रदेश की लैब के लिए कोरोना किट खरीदने की जिम्मेदारी थी। अगस्त-सितंबर 2021 के दौरान केजीएमयू ने जिस आरटीपीसीआर किट की खरीद 26.32 रुपये के हिसाब से की, महाराष्ट्र में वही किट 18.48 रुपये में खरीदी गई। इसकी वजह से सरकारी धन का काफी नुकसान हुआ है।
केजीएमयू में शुरुआती समय में बिना टेंडर मूल्य आधारित अनुबंध करने पर भी लेखा परीक्षक प्रथम की ओर से आपत्ति जताई जा चुकी है। वहीं महंगी किट खरीदने के मामले में लोकायुक्त की जांच भी जारी है। कोरोना संक्रमण के मामले शांत होने के बाद अब एक-एक करके कोरोना किट की खरीद में हुए खेल की परतें खुल रही हैं।
सौ करोड़ से ज्यादा की खरीद का अनुमान
केजीएमयू में कुल मिलाकर कितने रुपये की कोरोना किट खरीदी गई है, अभी तक इसका आकलन नहीं हुआ है, लेकिन यह राशि कई करोड़ रुपये है। पांच फरवरी 2021 को मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष-कोविड केयर फंड के माध्यम से केजीएमयू को महज दो महीने के लिए ही 22 करोड़ 84 लाख 80 हजार रुपये जारी किए गए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि साल भर में यह राशि सौ करोड़ रुपये से भी ऊपर पहुंच गई होगी।
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नियम-कानून के दायरे में हुई सभी खरीद
कोरोना किट की सभी खरीद नियम और प्रक्रिया के तहत हुई थी। खरीद में कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है। यह साल भर पुराना मामला है और इसका निपटारा हो चुका है। ऑडिट ऑब्जेक्शन के मामले में भी सरकार की अनुमति प्राप्त थी। सभी दस्तावेजों के साथ इसे शासन को भेजा जा रहा है।
- डॉ. बिपिन पुरी, कुलपति केजीएमयू
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केजीएमयू में शुरुआती समय में बिना टेंडर मूल्य आधारित अनुबंध करने पर भी लेखा परीक्षक प्रथम की ओर से आपत्ति जताई जा चुकी है। वहीं महंगी किट खरीदने के मामले में लोकायुक्त की जांच भी जारी है। कोरोना संक्रमण के मामले शांत होने के बाद अब एक-एक करके कोरोना किट की खरीद में हुए खेल की परतें खुल रही हैं।
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सौ करोड़ से ज्यादा की खरीद का अनुमान
केजीएमयू में कुल मिलाकर कितने रुपये की कोरोना किट खरीदी गई है, अभी तक इसका आकलन नहीं हुआ है, लेकिन यह राशि कई करोड़ रुपये है। पांच फरवरी 2021 को मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष-कोविड केयर फंड के माध्यम से केजीएमयू को महज दो महीने के लिए ही 22 करोड़ 84 लाख 80 हजार रुपये जारी किए गए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि साल भर में यह राशि सौ करोड़ रुपये से भी ऊपर पहुंच गई होगी।
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नियम-कानून के दायरे में हुई सभी खरीद
कोरोना किट की सभी खरीद नियम और प्रक्रिया के तहत हुई थी। खरीद में कोई वित्तीय हानि नहीं हुई है। यह साल भर पुराना मामला है और इसका निपटारा हो चुका है। ऑडिट ऑब्जेक्शन के मामले में भी सरकार की अनुमति प्राप्त थी। सभी दस्तावेजों के साथ इसे शासन को भेजा जा रहा है।
- डॉ. बिपिन पुरी, कुलपति केजीएमयू