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किसान सम्मान निधि योजना: लेखपालों से काम करवाया, नहीं किया भुगतान, रिपोर्ट तलब

Mon, 28 Oct 2019 11:58 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 28 Oct 2019 11:58 AM IST
सार

शासन के निर्देश पर राजस्व परिषद ने जिलाधिकारियों से मांगी रिपोर्ट
रिपोर्ट आने पर शासन स्तर से प्रोत्साहन भुगतान पर फैसला संभव
 

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kisan samman nidhi yojana : work taken by lekhpal but no wages paid now report asked
lekhpal - फोटो : amar ujala

विस्तार

लोकसभा चुनाव के दौरान किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन का काम लेखपालों से करवाया गया, लेकिन इस के लिए केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत मानदेय नहीं दिया गया। सरकार के सामने यह मामला उठाए जाने के बाद राजस्व परिषद ने जिलाधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।
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केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव के दौरान किसान सम्मान निधि योजना का एलान किया था। इसके तहत मिलने वाले 6000 वार्षिक में से 2000 रुपये की पहली किस्त का भुगतान चुनाव आचार संहिता लागू होने के पहले किया जाना था। 
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सरकार से लेकर जिले तक के अफ सरों ने कृषि विभाग के जरिये संचालित इस काम को तेजी से पूरा करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग के लेखपालों पर डाली। मुख्य सचिव से कलेक्टर तक इस योजना के क्रियान्वयन में प्रतिष्ठा लगाते नजर आए। नतीजा यह हुआ कि योजना में प्रदेश की सबसे अच्छी उपलब्धि रही। 
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करीब एक करोड़ किसानों को निधि की पहली किस्त का भुगतान शुरुआती दिनों में ही कर दिया गया। चुनाव में मतदाताओं के बीच इस योजना का क्रियान्वयन सर्वाधिक चर्चा में रहा। लेकिन, प्रदेश के अफसर केंद्र की ओर से योजना के क्रियान्वयन से जुड़े कार्मिकों के लिए तय किए गए इंसेंटिव को दबा गए।

लेखपाल संघ की शिकायत पर राजस्व विभाग ने राजस्व परिषद से रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद राजस्व परिषद ने समस्त जिलाधिकारियों से पूछा है कि क्या योजना का काम लेखपालों से कराया गया है? क्या इस कार्य के लिए संबंधित लेखपालों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया है? 

जिलाधिकारियों ने काम कराने और किसी तरह का भुगतान न किए जाने की रिपोर्ट भेजनी शुरू कर दी है। परिषद से सभी 75 जिलों की रिपोर्ट संकलित कर शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद इस संबंध में निर्णय की संभावना है।
 

एमपी ने प्रति लाभार्थी 18 रुपये दिये : लेखपाल संघ

लेखपाल संघ की शिकायत के मुताबिक प्रदेश के प्रत्येक लेखपाल ने सर्वे, अभिलेख जुटाने, सूचनाएं फीडिंग में करीब 10-10 हजार रुपये खर्च किए। केंद्र ने इस काम के इंसेंटिव के रूप में 10 रुपये प्रति लाभार्थी तय किए थे। जबकि मध्य प्रदेश सरकार ने 8 रुपये अपनी ओर से मिलाकर 18 रुपये का भुगतान किया। यूपी के लेखपाल भी एमपी की तरह भुगतान की मांग कर रहे हैं।

लेखपालों के शस्त्र लाइसेंस आवेदन पर तेजी से कार्यवाही के निर्देश
राजस्व परिषद ने कन्नौज में लेखपाल-अधिवक्ता विवाद के बाद शस्त्र लाइसेंस की मांग करने वाले लेखपालों के प्रत्यावेदन का निस्तारण तेजी से कराने को कहा है। लेखपाल संघ ने उपजिलाधिकारी की संस्तुति पर सीधे लाइसेंस जारी करने का आग्रह किया था। राजस्व परिषद की प्रभारी अधिकारी रीना सिंह ने जिलाधिकारियों से कहा है कि वे स्थानीय स्तर पर लेखपालों के प्रार्थनापत्र का नियमानुसार तेजी से निस्तारण कराएं।
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