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लखनऊ के ये युवा खेती को बना रहे मुनाफे का सौदा, बोले- किसानों को भविष्य के लिए तैयार कर रहे

Wed, 23 Dec 2020 05:43 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 23 Dec 2020 05:43 PM IST
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Kisan Diwas: Youth taking agriculture as a career in Lucknow.
डॉ. कामिनी सिंह। - फोटो : amar ujala

देश की खेती को नया और आधुनिक नजरिया देने के लिए जरूरी है कि इससे युवा जुड़ें। यह सुखद है कि राजधानी में ऐसे ही युवा किसानों की पौध तैयार हो रही है। वे खेती को मुनाफे का सौदा बना रहे हैं। परंपरागत तरीकों से अलग ये आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं वो अन्य युवाओं के लिए भी मिसाल हैं। किसान दिवस पर आइए हम जानते हैं लखनऊ के कुछ युवा किसानों के बारे में।

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खेती के लिए छोड़ दी नौकरी
सीतापुर रोड निवासी डॉ. कामिनी सिंह ने सीआईएसएच में 2008 से 2015 तक नौकरी की। इसी दौरान पीएचडी किया। नौकरी करते करते लगा कि जो काम फील्ड में किया जा सकता है वह चारदीवारी के भीतर नहीं हो सकता है। बस इसी सोच के साथ 2015 में जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाया। सबसे बड़ी चुनौती थी, जैविक खेती के लिए किसानों को तैयार करना, क्योंकि यह महंगी पड़ती है। बीच का रास्ता निकाला, सुगंध व औषधीय पौधों की खेती शुरू कर दी है। सहजन, लेमन ग्रास, खस, तुलसी, कालमेघ जैसे पौधों पर काम शुरू किया। इसमें बहुत ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ी और जमीन को खेती के लिए उपयोगी बनाया जा सका। एक तरफ हम खेती कर रहे तो दूसरी तरफ हम हमने एग्रोबिजनेस खड़ा किया है। हम किसानों को भी भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।

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शुरू की फूल व मशरूम की खेती

Kisan Diwas: Youth taking agriculture as a career in Lucknow.
गौरव कुमार। - फोटो : amar ujala

इंटर के छात्र गौरव कुमार मलिहाबाद के ढकवा में रहते हैं। कहते हैं पिताजी धान और गेहूं उगाते थे। यह कई बार घाटे का सौदा साबित होता था। हम केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान से जुड़े। तकनीकी प्रशिक्षण मिला तो आधुनिक खेती करने लगे। कम समय में ज्यादा मुनाफे के लिए ग्लैडिओलस की खेती शुरू की, इसके बाद मशरूम उगाने लगे। फिलहाल खेती के साथ पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।

पति-पत्नी दोनों ने थामी आधुनिक खेती की राह

Kisan Diwas: Youth taking agriculture as a career in Lucknow.
किरन व महेश। - फोटो : amar ujala

किरन मलिहाबाद में रहती हैं। पति रमेश बाहर काम करते थे। किरन ने खेतीबाड़ी संभाली। रहमान खेड़ा में जब फार्मर फर्स्ट प्रोजेक्ट शुरू हुआ तो ये किरन भी इसका हिस्सा बनी और शुरू की आधुनिक खेती। पति ने अपने दम पर एक नई शुरुआत की। अब पति वापस आ चुके हैं। पति-पत्नी मिलकर आधुनिक खेती कर रहे हैं। किरन कहती हैं कि केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में प्रशिक्षण के दौरान हमने हमने आधुनिक खेती को समझा।

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