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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   kinship in indian politics

UP: बहन-भाई, चाचा के नाम पर खूब हुई राजनीति

Tue, 06 May 2014 06:46 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 06 May 2014 06:46 PM IST
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kinship in indian politics

सूबे की सियासत में ‘बहन-भाई’ की चर्चा आते ही मायावती और लालजी टंडन का नाम दिमाग में आ जाता है।

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‘चाचा’ का मतलब शिवपाल सिंह यादव से लगाते हैं तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मायावती को ‘बुआ’ कहते नजर आते हैं।

अब नरेंद्र मोदी ने सोनिया गांधी की पुत्री प्रियंका वाड्रा का ‘बेटी’ के रूप में उल्लेख किया तो ये सियासी रिश्तेदारियां फिर लोगों की जुबान पर हैं।

अखिलेश की बुआ बनीं मायावती

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भाजपा और बसपा की मिली-जुली सरकार के बीच मायावती और लालजी टंडन के बीच भाई-बहन का सियासी रिश्ता राखी बांधने-बंधाने तक पहुंच गया था।

हालांकि इस रिश्ते की बुनियाद कितनी मतलबी थी, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि दोनों पार्टियों का गठबंधन टूटते ही रिश्ते का यह बंधन जहां का तहां रह गया।

हाल ही मुलायम सिंह यादव ने मायावती के लिए फैजाबाद में बेहद आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया।

अब अखिलेश यादव उस चोट को हल्का करने के लिए मायावती को ‘बुआ’ कहते घूम रहे हैं।

वहीं, सपा के लोग और बड़े-बड़े मंत्री व नेता शिवपाल सिंह यादव को ‘चाचा’ कहकर बुलाते हैं तो उमा भारती कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह को दादा भाई कहकर बुलाती हैं।

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मोदी बनाम प्रियंका

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सियासत में रिश्तों पर ताजा घमासान चुनावी चर्चा के बीच ‘बेटी’ शब्द के इस्तेमाल से शुरू हुआ है।

दूरदर्शन के एक इंटरव्यू में जब नरेंद्र मोदी से प्रियंका द्वारा उन पर हमलों के बारे में सवाल हुआ तो मोदी ने प्रियंका को बेटी जैसी बताते हुए कहा था कि देश की संस्कृति में बेटियों पर राजनीतिक हमला नहीं बोला जाता।

इस पर वित्त मंत्री पी. चिंदबरम ने कटाक्ष करते हुए कहा कि शायद ही प्रियंका उन्हें पितातुल्य मानें। कुछ ही देर बाद प्रियंका ने बेहद तल्ख भाषा में जवाब दिया।

इस घटना से यह बात फिर सामने आ गई कि रिश्तों को सियासत का अंग बनाया जा रहा है।

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सियासी चौसर की भेंट चढ़े निजी रिश्तों के संबोधन

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बहन-भाई.. चाचाजी.. बुआजी.. दादा भाई और बेटी। आम तौर पर निजी रिश्तों में प्रयोग होने वाले ये संबोधन सियासी चौसर की भेंट चढ़ गए हैं।

इन संबोधनों की पवित्रता और उसकी भावना को नजर अंदाज कर उसका मखौल उड़ाने का चलन तेज हो गया है। मुलायम सिंह यादव जैसे नेता की मायावती के संबंध में आई टिप्पणी ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।

वहीं नरेंद्र मोदी द्वारा प्रियंका गांधी के लिए ‘बेटी’ शब्द का जिस भावना से उल्लेख किया गया, उसका जिस तरह मखौल उड़ाया गया, यह दु:खद है।

सियासतदानों को या तो रिश्ते पर बात नहीं करनी चाहिए, या फिर उसकी पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए। आम लोगों को इससे बहुत तकलीफ होती है।
-डॉ. शैलेंद्र नाथ मिश्र, अध्यक्ष हिंदी विभाग, लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय, गोंडा

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