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खादी बोर्ड ने अपने मन से बढ़ा दी रिटायरमेंट उम्र
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2014 09:36 AM IST
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खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र दो साल बढ़ाकर 58 से 60 साल कर दी। इसके लिए शासन से कोई मंजूरी भी नहीं ली गई।
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अब इस खुलासे के बाद मामले में लीपापोती की कोशिश तेज हो गई है। इस समय बोर्ड में 61 कर्मचारी ऐसे हैं जो 58 साल की उम्र पूरी करने के बाद भी नौकरी कर रहे हैं।
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इन पर साढ़े चार करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च आ रहा है। वित्त विभाग ने बोर्ड को इसके लिए स्वीकृति देने से इन्कार कर दिया है।
जानकार बताते हैं कि शासन ने नवंबर 2001 में राज्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 58 साल से बढ़ाकर 60 साल कर दी थी।
बोर्ड ने भी उसी आधार पर अपने कर्मियों को 60 साल पर रिटायर करना शुरू कर दिया। इसके लिए शासन से आवश्यक अनुमति भी नहीं ली गई।
काफी समय बाद बोर्ड ने शासन से अपने फैसले की कार्येत्तर यानी निर्णय लेने के बाद स्वीकृति मांगी लेकिन वित्त विभाग ने इस पर सहमति नहीं दी।
साथ ही बिना शासन की अनुमति के कर्मियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने के फैसले पर सवाल खड़ा कर दिया। तर्क दिया गया कि हर साल साढ़े चार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च बोर्ड कैसे वहन करेगा, यह स्पष्ट नहीं है।
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इसके बावजूद फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई। गुपचुप तरीके से चल रही इस कार्रवाई में नया मोड़ शासन के 12 अगस्त 2013 के शासनादेश से आया।
शासन ने इस शासनादेश के जरिये स्वायत्तशासी संस्थाओं के कर्मियों की भी सेवानिवृत्ति उम्र 58 से बढ़ाकर 60 साल करने की सैद्धांतिक सहमति दे दी और शर्त लगा दी कि संस्थाएं यह बताएंगी कि इस पर आने वाले अतिरिक्त खर्च की व्यवस्था वे कैसे करेंगी।
साथ ही इसके लिए संस्थाओं को कैबिनेट की स्वीकृति व वित्त विभाग की सहमति से शासनादेश करवाना होगा। इस शासनादेश ने बोर्ड की मुश्किल बढ़ा दी है।
अब खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने शासन से पूछा है कि वह अपने कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 माने या 60 साल? इस सवाल के साथ ही कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है।
इस समय जो 61 कर्मचारी 58 साल की उम्र पूरी करने के बाद भी बोर्ड में कार्यरत हैं उनमें 30 अधिकारी और कर्मचारी इसी साल दिसंबर में और बाकी 31 अगले साल रिटायर होंगे।