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बच्चों की आंखों पर अध्ययन करेगा केजीएमयू, बीमारियों की पहचान कर इलाज की होगी व्यवस्था

Thu, 19 Dec 2019 03:00 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 19 Dec 2019 03:00 PM IST
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KGMU will study on eyes of children
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

बच्चों में आंखों की बीमारियों का अब नए सिरे से अध्ययन किया जाएगा। लखनऊ के करीब ढाई हजार बच्चों की आंखों की फोटोग्राफी कराई जाएगी। इस फोटो के आधार पर बीमारियों का आकलन किया जाएगा। यह जिम्मेदारी केजीएमयू को सौंपी गई है।

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केजीएमयू की रिपोर्ट के आधार पर बच्चों की आंखों की सेहत सुधारने की दिशा में पहल होने की उम्मीद है। प्रदेश के काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की ओर से बच्चों की आंखों की बीमारी की आकलन किया जा रहा है।यह जिम्मेदारी केजीएमयू को सौंपी गई है।
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इसकी निगरानी नेत्र रोग विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल करेंगे। इसके लिए केजीएमयू में दो साल के लिए जूनियर रिसर्च असिस्टेंट की तैनाती भी की जाएगी। केजीएमयू की टीम राजधानी के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के ढाई हजार बच्चों की आंखों की फोटोग्राफी करेगी। फिर फोटोग्राफ के आधार पर आंखों से जुड़ी बीमारी, उनके आकार, प्रकार पर अध्ययन किया जाएगा।

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समय पर उपचार जरूरी

KGMU will study on eyes of children
इस अध्ययन रिपोर्ट को काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी को भेजा जाएगा। इस आधार पर सरकार की ओर से प्रदेश के अन्य स्कूलों के बच्चों की भी आंखों की जांच कराकर उनके इलाज की व्यवस्था की जा सकती है।

डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक गजेट का प्रयोग अधिक होने से बच्चों के दृष्टि बाधित होने की समस्या जल्दी आ रही है। बदलती जीवनशैली से शुगर, मोटापा सहित अन्य समस्याएं हैं, जो आंखों को प्रभावित करती हैं।

दो साल होगा अध्ययन

KGMU will study on eyes of children
प्रतीकात्मक तस्वीर
ग्लूकोमा व आंख के कैंसर के भी केस आ रहे हैं। इनका समय पर इलाज हो जाए तो आंखों को बचाया जा सकता है। ऐसे मेें एक तंत्र विकसित करने की जरूरत है, जिससे बच्चों की आंखों का समय रहते उपचार किया जा सके। संभव है कि इस प्रयोग के जरिये नया तंत्र विकसित करने का प्रयास किया जाए।

इनोवेशन के तहत यह नया प्रयोग किया जा रहा है। इसके तहत सरकारी स्कूल में बढ़ने वाले ढाई हजार बच्चों की आंखों की फोटोग्राफी की जाएगी। उसके जरिये आंखों की स्थिति पर अध्ययन किया जाएगा। करीब दो साल तक चलने वाले इस अध्ययन की तैयारी शुरू हो गई है। भविष्य में इसके बड़े फायदे सामने आ सकते हैं। - डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल, मुख्य इंवेस्टिगेटर, केजीएमयू
 
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