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Lucknow News: केजीएमयू करेगा रेफरल पॉलिसी की अगुवाई
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केजीएमयू।
लखनऊ। घायलों को जल्द उनके निकटतम अस्पताल में इलाज उपलब्ध कराने संबंधी नीति बनाने की केजीएमयू अगुवाई करने जा रहा है। इस नीति का मकसद मरीजों को एक स्थान से दूसरी जगह बिना जरूरत भेजने की आदत पर रोक लगाने और गंभीर घायल को ही रेफर करना है।
केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में रोजाना तीन सौ से ज्यादा गंभीर घायल आते हैं। इनमें से काफी ऐसे होते हैं, जिन्हें जिलास्तर पर इलाज मिल सकता है, मगर ऐसा नहीं होता। इससे घायल को इलाज मिलने में देरी होती है। ट्रॉमा सेंटर पर बोझ भी पड़ता है। इसे देखते हुए प्रदेश स्तर पर रेफरल पॉलिसी बनाई जानी है।
गंभीर घायलों के मामले में अहम है पहला घंटा
ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. प्रेमराज ने बताया कि गंभीर रूप से घायलों के लिए पहला घंटा बेहद अहम होता है। रेफरल पॉलिसी का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सकेगा। ऐसा देखा जाता है कि कई बार मरीजों को गंभीर चोट लगने के बावजूद उन्हें विभिन्न अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका बहुमूल्य समय बर्बाद होता है। इसकी वजह से घायलों की स्थिति और बिगड़ सकती है।
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कोविड महामारी के समय लागू हुई थी व्यवस्था
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्रदेश स्तर पर पोर्टल बनाकर मरीजों की भर्ती व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए रेफरल पॉलिसी बनाई गई थी। इससे सभी को यह पता रहता था कि किस अस्पताल में कितने मरीज भर्ती हैं और वहां कितने बेड खाली हैं। गंभीर मरीजों के मामले में भी यह पॉलिसी बनने पर सभी को इलाज मिल सकेगा।
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केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में रोजाना तीन सौ से ज्यादा गंभीर घायल आते हैं। इनमें से काफी ऐसे होते हैं, जिन्हें जिलास्तर पर इलाज मिल सकता है, मगर ऐसा नहीं होता। इससे घायल को इलाज मिलने में देरी होती है। ट्रॉमा सेंटर पर बोझ भी पड़ता है। इसे देखते हुए प्रदेश स्तर पर रेफरल पॉलिसी बनाई जानी है।
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गंभीर घायलों के मामले में अहम है पहला घंटा
ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. प्रेमराज ने बताया कि गंभीर रूप से घायलों के लिए पहला घंटा बेहद अहम होता है। रेफरल पॉलिसी का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सकेगा। ऐसा देखा जाता है कि कई बार मरीजों को गंभीर चोट लगने के बावजूद उन्हें विभिन्न अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका बहुमूल्य समय बर्बाद होता है। इसकी वजह से घायलों की स्थिति और बिगड़ सकती है।
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कोविड महामारी के समय लागू हुई थी व्यवस्था
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्रदेश स्तर पर पोर्टल बनाकर मरीजों की भर्ती व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए रेफरल पॉलिसी बनाई गई थी। इससे सभी को यह पता रहता था कि किस अस्पताल में कितने मरीज भर्ती हैं और वहां कितने बेड खाली हैं। गंभीर मरीजों के मामले में भी यह पॉलिसी बनने पर सभी को इलाज मिल सकेगा।