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केजीएमयू की नींद खुली : डायलिसिस कंपनी को किया भुगतान, कल से 10 मशीन चालू

Wed, 20 Feb 2019 05:59 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Wed, 20 Feb 2019 05:59 PM IST
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kgmu rise from deep sleep pays outstanding amount 10 machine to work from tomorrow
केजीएमयू में डायलिसिस की व्यवस्था बेपटरी हो गई थी - फोटो : amar ujala
केजीएमयू गहरी नींद में सो रहा था। अस्पताल में लगी 17 डायलिसिस मशीनों में से जब 14 बंद हो गईं और मरीजों को खासी परेशानी हुई। तब उसी नींद टूटी और उसने डायलिसिस मशीन वाली कंपनी को बकाए 60 लाख का भुगतान किया। इसके बाद कंपनी के इंजीनियर अस्पताल गए और डायलिसिस मशीनों की मरम्मत शुरू की। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कल से 10 मशीनों पर डायलिसिस शुरू हो जाएगी। 
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इससे पहले बुधवार तक स्थिति यह थी कि बकाये का हवाला देकर कंपनी ने 17 में से 14 मशीनें बंद कर दी थीं। इनमें से तीन तो मंगलवार को ही बंद की गईं। ऐसे में पहले जहां रोजाना 50-60 मरीजों की डायलिसिस होती थी, वहीं सिर्फ तीन मशीनों पर नौ मरीजों की डायलिसिस हो पा रही थी।
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नेफ्रोलॉजी विभाग में पीएमसी कंपनी ने 2014 में 17 डायलिसिस मशीनें लगाईं। केजीएमयू ने कंपनी के साथ 10 साल का अनुबंध किया। इसके तहत डायलिसिस के लिए कैश काउंटर पर जमा होने वाले रुपये सीधे पंजाब नेशनल बैंक के खाते में जमा होने लगे।
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माह के अंत में बैंक से कंपनी और केजीएमयू का हिस्सा अलग-अलग बांट कर खाते में भेज दिया जाता था। केजीएमयू में ई-हास्पिटल व्यवस्था लागू होने से नकद जमा करने की व्यवस्था भी बदल गई। तय किया गया कि कैश काउंटर पर आने वाला पूरा पैसा सीधे केजीएमयू के खाते में जमा होगा और वह कंपनी को उसके हिस्से का भुगतान करेगा।

अक्तूबर 2017 से कंपनी के हिस्से का भुगतान रोक दिया गया। इसी बीच 2018 में नेफ्रोलॉजी विभाग केे अध्यक्ष डॉ. संत कुमार पांडेय ने इस्तीफा दे दिया। कंपनी ने करीब दो करोड़ 35 लाख का बकाया मांगा तो केजीएमयू प्रशासन ने अनुबंध की पड़ताल की।

सूत्रों की मानें तो इसमें कई खामियां पाई गईं। इसे लेकर तत्कालीन नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष, कुलपति, कुलसचिव, सीएमएस और कंपनी के अधिकारियों की कई बैठकें हुईं, पर नतीजा सिफर रहा। इतना ही नहीं वित्त नियंत्रक ने भुगतान के लिए कंपनी की ओर से दिए जाने वाले प्रपत्र को अवैध ठहराया और नए सिरे से बिल तैयार करने की बात कही।

वहीं, कंपनी इस पर अड़ी रही कि अब तक गलत प्रपत्र पर किस नियम के तहत भुगतान होता रहा। इस बीच कंपनी ने एक के बाद एक 11 मशीनें बंद कर दीं। छह मशीनों पर डायलिसिस चलती रही, लेकिन मंगलवार से तीन मशीनें और बंद कर दी गईं। 
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