KGMU: टीका लेकर बुजुर्गों ने खुद को बचाया, जवानों ने खतरे में डाली जान
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओर से भर्ती मरीजों पर किए गए शोध में कहा गया है कि बिना टीका लगवाने वालों में 71.5 फीसदी तो टीका लगवाने वालों में सिर्फ 26.3 फीसदी संक्रमित हुए गंभीर बीमार हुए।
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कोविड-19 वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत में विकसित वैक्सीन ने बड़ी भूमिका अदा की है। दूसरी लहर के दौरान टीकाकरण कराने वाले बुजुर्गों की तबीयत संक्रमित होने के बावजूद कम खराब हुई। वहीं, टीका न लगने से संक्रमण ने युवाओं की हालत ज्यादा खराब की। केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग ने यह दावा अन्य विभागों के सहयोग से हुए शोध में किया है। दूसरी लहर के दौरान केजीएमयू में भर्ती मरीजों पर किए गए शोध में पाया गया कि टीकाकरण वाले समूह में 26.3 फीसदी की ही हालत गंभीर हुई। गैर टीकाकरण वाले समूह में यह आंकड़ा 71.5 प्रतिशत था।
यह अध्ययन डॉ. ज्योति बाजपेयी, डॉ. सूर्यकांत, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. अजय के पटवा, डॉ. वीरेंद्र आतम, डॉ. श्याम के चौधरी और डॉ. अनुज पांडेय ने किया है। शोध में दूसरी लहर के दौरान अप्रैल 2021 में भर्ती 142 संक्रमितों को शामिल किया गया। इससे पहले 16 जनवरी को ही टीकाकरण का शुभारंभ हुआ था। पहले चरण में हेल्थ केयर वर्कर तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों को ही शामिल किया गया।
अगले चरण में टीकाकरण का दायरा बढ़ाया गया। शोध में इन मरीजों को टीकाकरण और गैर टीकाकरण के दो समूह में बांटा गया। इसमें पाया गया कि टीकाकरण से बुजुर्ग संक्रमितों की हालत कम गंभीर हुई। दूसरी ओर टीकाकरण न होने से युवाओं की भी हालत गंभीर हो गई।
टीकाकरण वाले ग्रुप में सिर्फ 19 मरीज थे। इसमें से पांच की हालत गंभीर हुई तथा एक की मौत हुई, जबकि 14 मरीजों को ज्यादा समस्या नहीं हुई। वहीं, गैर टीकाकरण वाले ग्रुप में 123 मरीज शामिल थे। इनमें से 88 की हालत संक्रमण से बेहद गंभीर हो गई और 13 की मौत हो गई। 35 मरीजों की हालत अपेक्षाकृत कम गंभीर हुई।
मौत के मामले में ज्यादा अंतर नहीं
केजीएमयू ने यह शोध उस वक्त किया था जब टीकाकरण का प्रतिशत बेहद कम था। इसके अनुसार टीकाकरण और गैर टीकाकरण के मामलों में मौत के प्रतिशत में ज्यादा अंतर नहीं था। टीकाकरण वाले ग्रुप में मौत का प्रतिशत 5.2 था तो गैर टीकाकरण वाले ग्रुप में यह 9.1 फीसदी था। उधर, गंभीर और गैर गंभीर संक्रमितों के मामले में यह अंतर करीब तीन गुने का था। दोनों ही समूह के मरीजों को 10 से 15 दिन अस्पताल में भर्ती किया गया।
सौ से ज्यादा केंद्रों पर सामान्य और 14 पर बूस्टर डोज
जनपद में इस समय सौ से ज्यादा केंद्रों पर कोविड का टीका लगाया जा रहा है। यहां हेल्थ केयर वर्कर और फ्रं टलाइन वर्करों के साथ 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को एहतियाती डोज भी दी जा रही है। वहीं, राजधानी के 14 निजी केंद्रों पर 18 से 59 वर्ष तक की आयु वालों को बूस्टर डोज लगाई जा रही है। इसके लिए 386.25 रुपये देने होंगे।