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लखनऊ: केजीएमयू में बनेगा स्किन बैंक, छह माह सुरक्षित रहेगी दान में मिली त्वचा, जरूरतमंदों में होगी ट्रांसप्लांट

Thu, 22 Jul 2021 10:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Thu, 22 Jul 2021 10:24 AM IST
सार

दान में मिली त्वचा को निकालने में समय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह त्वचा व्यक्ति की मृत्यु के छह घंटे के भीतर निकाली जा सकती है। विशेष मशीन के माध्यम से त्वचा को 0.3 मिलीमीटर की मोटाई के साथ जांघ, पैर और पीठ से एपिडर्मिस व डर्मिस के कुछ हिस्से को निकाला जाता है। चेहरे, हाथ, छाती या शरीर के ऊपरी हिस्से की त्वचा नहीं निकाली जाती है। त्वचा निकालने के लिए विशेष उपकरणों की जरूरत होती है।

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Skin bank will be established in KGMU Lucknow.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

विस्तार

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में अब किसी मृत व्यक्ति की त्वचा छह महीने तक संभालकर रखी जा सकेगी। इसे गंभीर रूप से जले या फिर घायल व्यक्तियों में लगाया जा सकेगा। चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्लास्टिक एंड रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग में स्थापित होने जा रहे स्किन बैंक के माध्यम से यह संभव हो सकेगा। इसके लिए मुंबई के इंस्टीट्यूट से तकनीकी मार्गदर्शन लिया जा रहा है। विभाग की टीम ने पिछले सप्ताह मुंबई स्थित संस्थान का भ्रमण भी किया है। अब स्किन बैंक स्थापित करने के लिए जरूरी उपकरण खरीद की तैयारी चल रही है। अगले छह महीने के भीतर इसे स्थापित कर इसके माध्यम से प्लास्टिक सर्जरी की शुरुआत की जाएगी।

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केजीएमयू की कार्य परिषद ने प्लास्टिक एंड रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग में स्किन बैंक स्थापित करने की मंजूरी दी है। विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश मिश्रा के अनुसार संस्थान में काफी संख्या में ऐसे मरीज आते हैं जो अपने अंग दान करते हैं। मानव की त्वचा भी दान की जा सकती है, लेकिन अभी तक संस्थान में ऐसी सुविधा नहीं है जिससे कि त्वचा को सुरक्षित रखा जा सके। स्वाभाविक रूप से कटने या फिर सामान्य जलने पर त्वचा अपनी मरम्मत करने में सक्षम होती है, लेकिन गंभीर रूप से जलने या क्षतिग्रस्त होने पर ऐसा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में त्वचा प्रत्यारोपण का सहारा लिया जाता है। मृत व्यक्ति कुछ मामलों को छोड़कर ज्यादातर में अपनी त्वचा दान कर सकता है।
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मृत्यु के छह घंटे के भीतर निकाली जाती है त्वचा
दान में मिली त्वचा को निकालने में समय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह त्वचा व्यक्ति की मृत्यु के छह घंटे के भीतर निकाली जा सकती है। विशेष मशीन के माध्यम से त्वचा को 0.3 मिलीमीटर की मोटाई के साथ जांघ, पैर और पीठ से एपिडर्मिस व डर्मिस के कुछ हिस्से को निकाला जाता है। चेहरे, हाथ, छाती या शरीर के ऊपरी हिस्से की त्वचा नहीं निकाली जाती है। त्वचा निकालने के लिए विशेष उपकरणों की जरूरत होती है।

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जरूरी जांच के बाद प्रिजर्व की जाती है त्वचा

निकाली गई त्वचा को स्किन बैंक में प्रिजर्व करने से पहले एड्स, हेपेटाइटिस बी एवं सी, टीबी, पीलिया, स्किन कैंसर, त्वचा की बीमारी और सेप्टीसीमिया आदि की जांच की जाती है। इसके बाद ही इसे प्रत्यारोपण के योग्य माना जाता है। इन बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति अपनी त्वचा दान नहीं कर सकते हैं।

बर्न यूनिट स्थापित होने के बाद आई तेजी
केजीएमयू में बर्न यूनिट स्थापित होने के बाद से स्किन बैंक बनाने के काम में तेजी आई है। बर्न यूनिट में भर्ती काफी मरीजों को त्वचा प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। संस्थान में जनवरी 2021 से ही बर्न यूनिट की शुरुआत हुई है। यहां पर भर्ती मरीजों को भी त्वचा की जरूरत होती है। अभी तक प्रदेश के किसी संस्थान मेें स्किन बैंक की व्यवस्था नहीं है। स्किन बैंक स्थापित होने के बाद त्वचा प्रत्यारोपण का काम आसान हो जाएगा। स्किन बैंक स्थापित करने की लागत 50 से 60 लाख रुपये आने का अनुमान है।

कार्यपरिषद ने दी मंजूरी
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि विवि की कार्य परिषद ने स्किन बैंक को मंजूरी दे दी है। इसे स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोगों को स्किन बैंक के माध्यम से त्वचा प्रत्यारोपण की सुविधा मिलने लगेगी।

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