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परिवार का सदस्य अकेले में रहने लगे, चीजें गायब होने लगे तो हो जाएं सावधान

Thu, 15 Oct 2020 11:51 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 15 Oct 2020 11:51 AM IST
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KGMU is giving relief to the people from drug addiction

केस-1

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बालागंज के कारोबारी का बेटा ग्रेजुएशन के दौरान दोस्तों संग चरस लेने लगा। पढ़ाई छोड़ नशे की गिरफ्त में रहने लगा। घर में चोरी करता था। मानसिक रोग विभाग में आने पर सालभर तक दवाएं और काउंसिलिंग चली। अब ठीक होकर एमबीए कर रहा है। 
केस-2
गोमती नगर निवासी अधिकारी का बेटा गलत संगत से नशे का इंजेक्शन लेने लगा। परिवार से भी अलग रहने लगा। परिजन उसे मानसिक रोग विभाग लेकर आए। दो साल तक दवाएं चलने के बाद युवक ठीक हो गया है और कारोबार कर रहा है। 
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केजीएमयू लोगों को नशे की गिरफ्त से भी निकाल रहा है। यहां के मानसिक रोग विभाग में चल रहे नशा उन्मूलन केंद्र में ऑपीऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) के जरिये 110 लोगों को मुख्यधारा में लाने में कामयाबी मिली है। इसे विस्तारित करने की तैयारी चल रही है। मानसिक रोग विभाग में जो शराब सहित अन्य मादक पदार्थों का सेवन करते हैं, उनका भी यहां इलाज हो रहा है।
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वहीं, चरस, गांजा, हेरोइन एवं नशीले इंजेक्शन लेने वालों को ओएसटी थेरेपी दी जा रही है। सेंटर की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। इन दिनों राजधानी के 350 मरीज रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 170 मरीज रोजाना विभाग में इलाज करवाने आते हैं। ओपीडी कोविड में भी चली। अब इसे विस्तारित करने की तैयारी है। प्रयास है कि सर्वे कर ऐसे लोगों को केंद्र तक लाया जाए। डॉ. अमित आर्य बताते हैं कि यदि आपके परिवार का सदस्य अकेले में रहने लगे, चीजें गायब होने लगे, वह रात में देर से आता है व कमरा बंद कर लेता है तो सावधान रहने की जरूरत है। 

110 से ज्यादा मरीज आए मुख्यधारा में

KGMU is giving relief to the people from drug addiction
केजीएमयू
दो साल में मानसिक रोग विभाग 110 मरीजों को मुख्यधारा में ला चुका है। दवाओं, काउंसिलिंग से ये मरीज नशा छोड़कर पूरी तरह से अपने काम में लग गए हैं। खास बात यह है कि नशीले इंजेक्शन और चरस, हेरोइन आदि की गिरफ्त में आने वालों में करीब 50 प्रतिशत 40 साल से कम उम्र के लोग थे।

समृद्ध परिवार के होने के बाद भी ये दिनभर नशे की तलाश में रहते थे। कुछ दिन बाद परिवार ने भी इन्हें खुद से अलग कर लिया था। केजीएमयू में आने वाले नशे के लती हर श्रेणी के लोग हैं। युवाओं में सुविधा संपन्न परिवारों के लड़के ज्यादा होते हैं। उम्रदराज लोगों में रिक्शा चलाने वाले या घर से बाहर अकेले में रहने वाले लोग होते हैं। 

केंद्र में शराब छुड़ाने वाली दवाएं मुफ्त में दी जाती हैं। इंजेक्शन सहित अन्य तरह का नशा करने वालों को भी दवाएं दी जाती हैं। उनकी काउंसिलिंग होती है। मरीजों की मानसिक स्थिति के अनुसार दवाओं से नशीला पदार्थ नहीं पाने पर होने वाले विकार को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। परिवार के लोग सहयोग करते रहे और डॉक्टर की बातों को अपनाया जाए तो लती ठीक हो जाता है। - डॉ. अमित आर्य, मानसिक रोग विभाग, केजीएमयू 
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