{"_id":"67dc7801914e5c224a07dbbf","slug":"kgmu-eye-department-is-installing-artificial-eyes-lucknow-news-c-13-knp1002-1122958-2025-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: केजीएमयू का नेत्र विभाग लगा रहा कृत्रिम आंख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: केजीएमयू का नेत्र विभाग लगा रहा कृत्रिम आंख
विज्ञापन
लखनऊ। दुर्घटना या अन्य गंभीर बीमारी की वजह से आंख खोने वालों को केजीएमयू कृत्रिम नेत्र लगा रहा है। यह कृत्रिम नेत्र सामान्य आंख की तरह ही होती है। इससे देखा तो नहीं जा सकता है, मगर इसे देखकर पता नहीं चलता कि आंख नकली है। पॉलिमेथिल मैथाक्रिलेट से बनी इस आंख को मरीज की माप के अनुसार तैयार करने में 3-4 दिन लगते हैं।
केजीएमयू की वरिष्ठ ऑक्युलोप्लास्टिक सर्जन डॉ. अपजीत कौर का कहना है कि जिन लोगों ने किसी दुर्घटना, गंभीर बीमारी या जन्मजात विकार के कारण अपनी आंख गंवा दी हो, उनको लैब में तैयार कृत्रिम नेत्र लगाया जा सकता है। एक आंख गंवाने के बाद चेहरे पर आंख का स्थान रिक्त हो जाता है, जो देखने में अटपटा लगता है। इससे लोगों में हीनभावना आ जाती है। कृत्रिम नेत्र उनकी इसी समस्या को दूर करेगा। यह नेत्र लगाने के बाद चेहरे की खोई हुई सुंदरता वापस पाई जा सकती है। कृत्रिम नेत्र लगाने के बाद व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है।
उन्होंने बताया कि केजीएमयू में अब तक कई मरीजों को कृत्रिम आंखें लगाई जा चुकी हैं। इसमें दुर्घटना के शिकार मरीजों के साथ रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर से पीड़ित दो साल की बच्ची भी शामिल है। मरीजों की सुविधा के लिए ऑक्युलोप्लास्टी क्लीनिक संचालित की जाती है। मरीज 1000 रुपये में कृत्रिम आंख बनवा सकते हैं।
विज्ञापन
चार दिन में तैयार होती है आंख
डॉ. कौर ने बताया कि पॉलिमेथिल मैथाक्रिलेट से बनी कृत्रिम आंख लगाने से शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। इसे लैब में तैयार करने से पहले मरीज की आंख की माप ली जाती है। इसमें समय लगता है। आंख लगाने के दौरान मरीज को नियमित रूप से एक सप्ताह तक अस्पताल आना पड़ता है। उसके बाद हर तीन महीने में एक वर्ष तक रोगी को बुलाया जाता है। कृत्रिम आंख की देखभाल बहुत जरूरी है। मरीजों को सलाह दी जाती है कि नेत्र विशेषज्ञों से समय-समय पर परामर्श लेते रहें और आंख की सफाई का ध्यान रखें।
विज्ञापन
केजीएमयू की वरिष्ठ ऑक्युलोप्लास्टिक सर्जन डॉ. अपजीत कौर का कहना है कि जिन लोगों ने किसी दुर्घटना, गंभीर बीमारी या जन्मजात विकार के कारण अपनी आंख गंवा दी हो, उनको लैब में तैयार कृत्रिम नेत्र लगाया जा सकता है। एक आंख गंवाने के बाद चेहरे पर आंख का स्थान रिक्त हो जाता है, जो देखने में अटपटा लगता है। इससे लोगों में हीनभावना आ जाती है। कृत्रिम नेत्र उनकी इसी समस्या को दूर करेगा। यह नेत्र लगाने के बाद चेहरे की खोई हुई सुंदरता वापस पाई जा सकती है। कृत्रिम नेत्र लगाने के बाद व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि केजीएमयू में अब तक कई मरीजों को कृत्रिम आंखें लगाई जा चुकी हैं। इसमें दुर्घटना के शिकार मरीजों के साथ रेटिनोब्लास्टोमा कैंसर से पीड़ित दो साल की बच्ची भी शामिल है। मरीजों की सुविधा के लिए ऑक्युलोप्लास्टी क्लीनिक संचालित की जाती है। मरीज 1000 रुपये में कृत्रिम आंख बनवा सकते हैं।
विज्ञापन
चार दिन में तैयार होती है आंख
डॉ. कौर ने बताया कि पॉलिमेथिल मैथाक्रिलेट से बनी कृत्रिम आंख लगाने से शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। इसे लैब में तैयार करने से पहले मरीज की आंख की माप ली जाती है। इसमें समय लगता है। आंख लगाने के दौरान मरीज को नियमित रूप से एक सप्ताह तक अस्पताल आना पड़ता है। उसके बाद हर तीन महीने में एक वर्ष तक रोगी को बुलाया जाता है। कृत्रिम आंख की देखभाल बहुत जरूरी है। मरीजों को सलाह दी जाती है कि नेत्र विशेषज्ञों से समय-समय पर परामर्श लेते रहें और आंख की सफाई का ध्यान रखें।