डॉक्टरों ने किया कमाल, बदल दी कैंसर पेशेंट की सूरत
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केजीएमयू के डॉक्टरों की टीम ने दस घंटे की सर्जरी के बाद कैंसर पीड़ित मरीज को नई जिंदगी दे दी। तंबाकू का सेवन करने वाले इस मरीज को पता ही नहीं चला कि वह कब मुंह के कैंसर की चपेट में आ गया।
केजीएमयू इलाज के लिए पहुंचा तो हालात काफी खराब हो चुके थे। पूरा मुंह कैंसर कोशिकाओं की चपेट में था। केजीएमयू के सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम को इस ऑपरेशन में दस घंटे लगे।
इसमें जहां पैर की हड्डी से जबड़ा और ठुड्डी बनाया गया तो मुंह और होंठ के लिए हाथ के मांस का इस्तेमाल किया। अब मरीज पूरी तरह ठीक है और बात कर रहा है।
बलरामपुर के रहने वाले रामनरेशन (50) पंद्रह साल से तंबाकू का सेवन करते थे। एक दिन उनके दांत में दिक्कत हुई तो डॉक्टर के पास पहुंचे तो दांत उखाड़ दिया गया लेकिन जख्म नहीं भर रहा था।
नया जबड़ा और नए होंठ बना दिए सर्जरी से
30 मार्च को केजीएमयू आए तो पता चला कि रामनरेश के पूरे मुंह में कैंसर फैल चुका है और जान बचाने के लिए काफी हिस्सा निकालना पड़ेगा। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एके सिंह बताते हैं कि मरीज की हालत और जांच रिपोर्ट देखने के बाद सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों का पैनल बना फिर डबल फ्री फ्लैप सर्जरी की तैयारी की गई।
17 अप्रैल को सुबह नौ बजे सर्जरी शुरू हुई जो शाम सात बजे तक चली। इसमें मरीज के जबड़े का अगला हिस्सा, होंठ, मुंह और थुड्ड्डी के साथ गले के कुछ हिस्से को भी सर्जरी विभाग की टीम ने निकाल दिया।
इस दौरान चेहरे को नया आकार देने के लिए प्लास्टिक सर्जरी की टीम ने मरीज के पैर की हड्डी से जबड़ा और थुड्डी बनाया। जैसे ही खराब हिस्से को निकाला गया प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम ने फिमुला से बनाए गए जबड़े और थुड्डी को फिक्स कर दिया।
प्रो. एके सिंह बताते हैं कि रामनरेश के बाएं हाथ से मांस और कुछ नसों को निकालकर होंठ का आकार दिया गया ताकि चेहरे की खूबसूरती बनी रहे।
महज 6 हजार में बन गए ये नए अंग
सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण सोनकर बताते हैं कि एक साथ दो विभागों की टीम सर्जरी में लगी। सर्जरी विभाग की टीम ने उस खराब हिस्से को निकाला तो प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम मरीज पैर की हड्डी से नया अंग बनाती रही। इसे डबल फ्री फ्लैप सर्जरी का नाम दिया गया। प्रो. एके सिंह और प्रो. अरुण सोनकर बताते हैं कि इस तरह की सर्जरी उत्तर भारत में पहली बार की गई है।
डबल फ्री फ्लैप सर्जरी के बारे में प्रो. एके सिंह बताते हैं कि फिमुला सीधी हड्डी होती है। जबड़े और थुड्डी का आकार देने के लिए हड्डी को अलग करने के बजाय पैर में लगे रहते हुए ही सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट से आकार दिया जाता है।
खराब हिस्सा निकालने के बाद पैर की हड्डी से बनाया गया जबड़ा और थुड्डी को फिक्स कर दिया जाता है। इसे प्लेट पर स्क्रू से सेट किया जाता है जिससे नए अंग में निरंतर ब्लड सप्लाई बनी रहे। डॉ. अरुण सोनकर बताते हैं कि डबल फ्री फ्लैप सर्जरी के लिए प्राइवेट अस्पतालों में तीन से चार लाख रुपये का खर्च आता है। केजीएमयू में इस सर्जरी के लिए महज छह हजार रुपये का खर्च आया वह भी प्लेट पर।