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जापानी इंसेफेलाइटिस के लिए नई दवा खोजी, इलाज के साथ रिएक्शन पर भी होगा नियंत्रण

Wed, 24 Nov 2021 02:09 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Nov 2021 02:09 AM IST
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Kgmu Doctor search medicine for JE
केजीएमयू के डॉक्टर ने जेई के इलाज की दवा खोजी। - फोटो : ??? ?????
केजीएमयू के डॉक्टर शैलेंद्र सक्सेना ने जापानी इंसेफेलाइटिस की नई दवा खोजने का दावा किया है। उनकी खोज को अमेरिका की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका एसीएस केमिकल न्यूरोसाइंस में मान्यता मिली है।
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करीब पांच साल के शोध में यह निष्कर्ष निकाला गया कि इस बीमारी में बेलाडोना एंटीवायरल ड्रग के रूप में काम करती है।
यह दवा वायरस को तो मारती ही है, साथ ही इसका दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता है। देशभर में हर साल इस बीमारी के करीब 68 हजार नए केस आते हैं। इनमें से करीब 17 हजार लोगों की असमय मौत भी हो जाती है।
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डॉ. शैलेंद्र सक्सेना ने बताया कि यह बीमारी फ्लेवीवायरस से संक्रमित मच्छर के काटने से होती है। इसमें वायरस व्यक्ति के दिमाग तक पहुंच जाता है। इससे न्यूरॉन्स मरने लगते हैं और दिमाग में सूजन आने लगती है।
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नतीजतन उल्टी, चक्कर तथा अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं शुरू हो जाती हैं। अभी तक जेई की कोई मान्य दवा उपलब्ध नहीं है। इसके लिए साइटोपेथिक मेडिसिन बेलाडोना का इस्तेमाल किया गया।
इसे हाइड्रोएल्कोहोलिक फॉर्मूलेशन ऑफ बेलाडोना या बी 200 का नाम दिया गया है। डॉ. सक्सेना के अनुसार वर्ष 2016 में उन्होंने इस पर काम करना शुरू किया, जो 2020 में पूरा हुआ। अब इसे एसीएस केमिकल न्यूरोसाइंस में प्रकाशित किया गया है।
न्यूरॉन्स को नहीं करता नुकसान
जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले में व्यक्ति के न्यूरॉन्स मरने लगते हैं। इसके लिए जो दवाएं दी जाती हैं, उनसे माइक्रोग्लिका बढ़ने लगता है। इससे अन्य समस्याएं होती हैं। वहीं, बी 200 से वायरस तो मर जाता है, पर न्यूरॉन्स नहीं मरते। इससे माइक्रोग्लिका नहीं बढ़ पाता है।

आंध्र प्रदेश में क्लीनिकल ट्रायल शुरू
डॉ. शैलेंद्र सक्सेना के अनुसार आंध्र प्रदेश में दवा का क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो गया है। इसके सकारात्मक परिणाम आए हैं। सरकार ने इसे मान्यता दी है। पूरी तरह से ट्रायल पूरा होने के बाद इसे गोरखपुर तथा जापानी इंसेफेलाइटिस से प्रभावित अन्य क्षेत्र में भी लागू किया जाएगा।
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