गिरफ्त में आया केजीएमयू का ठग डॉक्टर!
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एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर 31 लाख रुपये ठगने वाले केजीएमयू के डॉ. केपी सिंह उर्फ कालेश्वर प्रसाद सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।
केजीएमयू के माइक्रो बायोलॉजी के प्रोफेसर केपी सिंह इसी मामले में पहले से ही निलंबित चल रहे थे। सोमवार देर शाम चौक पुलिस ने उसे विभूतिखंड में मंत्री आवास स्थित उसके फ्लैट से गिरफ्तार किया।
यह ठगी नोएडा में रजत कंसल्टेंसी के संचालक बरेली के रहने वाले रजत गुप्ता उर्फ राहुल के जरिये की गई थी। पुलिस को रजत की तलाश है। एमबीबीएस में दाखिले में ठगी को लेकर नोएडा में भी मामला दर्ज है।
सीओ चौक सर्वेश मिश्रा ने बताया कि ठगी का शिकार बने गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी पंकज सक्सेना व इंदौर के अंबिकापुरी निवासी हेमंत त्रिपाठी ने चौक कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
ऐसे ठगा दो छात्रों को
हेमंत का आरोप था कि डॉ. केपी सिंह ने 3 सितंबर को 12.50 लाख रुपये लेकर उनकी बेटी समीक्षा का एमबीबीएस में दाखिला कराने का वादा किया था।
उन्होंने समीक्षा का इंटरव्यू भी लिया। इसी तरह पंकज सक्सेना से उनकी बेटी पारुल के दाखिले के नाम पर 11 अगस्त को 18.50 लाख रुपये भी लिए गए थे।
दोनों अभिभावकों का कहना था कि डॉ. केपी सिंह ने फार्माकोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डीके कटियार के कक्ष में रकम ली। दाखिला न होने पर डॉ. केपी ने कभी कोटे की सीट से प्रवेश दिलाने तो कभी हाईकोर्ट के स्टे का बहाना करना शुरू कर दिया।
पंकज सक्सेना ने फेसबुक के जरिये डॉ. केपी की पहचान की। कॉल डिटेल व अन्य साक्ष्य जुटा करके डॉ केपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
दागदार रहा है दामन
डॉ. केपी सिंह बसपा शासनकाल से ही फर्जीवाड़े के लिए चर्चित रहे। केजीएमयू में कर्मचारियों की भर्ती रही हो या फिर खनन के ठेके दिलाने का काम, किसी भी धंधे से परहेज नहीं किया।
उनके हाथों ठगे गए लोग केजीएमयू भी पहुंचने लगे थे और कई के हाथों वो पिटे भी। बसपा शासनकाल में एक कद्दावर आईएएस को वो अपना रिश्तेदार बताते थे। केजीएमयू सूत्रों का कहना है कि वो सचिवालय में इस आईएएस अधिकारी के कमरे में बैठकर फर्जीवाड़ा करने लगे थे।
जब इस मामले का खुलासा हुआ तो उनके सचिवालय जाने पर रोक भी लग गई। उनके कई नजदीकियों का कहना है कि एक रेजीडेंट डॉक्टर से भी उनके संबंध थे। ये डॉक्टर उनके लाखों रुपये लेकर फरार हो गई थी।
डॉ. कटियार को राहत
इस मामले के विवेचक राधा रमण सिंह का कहना है कि डॉ. केपी सिंह ने फार्माकोलॉजी विभाग के डॉ. डीके कटियार के कमरे में बैठकर कई डील की थी। उनकी भी इस प्रकरण में जांच की जा रही है।
डॉ.केपी सिंह के खिलाफ साक्ष्य मिलने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर कई लोगों से ठगी की शिकायतों को डॉ. केपी सिंह व डॉ डीके कटियार फर्जी बता रहे थे।
डॉ. कटियार ने 15 अक्तूबर को चौक पुलिस को दो पन्नों का पत्र भी सौंपकर डॉ. केपी सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
इस बीच कुलपति प्रो रविकांत ने दोनों डॉक्टरों को नोटिस देकर जवाब तलब करने के बाद निलंबित कर दिया था। फजीहत होने पर उनके कमरे भी सील कर दिए गए थे।
केजीएमयू के डॉक्टरों पर एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर नोएडा, दिल्ली, भोपाल, इंदौर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर समेत विभिन्न जिलों के युवाओं से एक करोड़ से अधिक की ठगी के आरोप लगे थे।