फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   KGMU and SGPGI starts prepration for genome sequencing.

जीनोम सीक्वेंसिंग की तैयारी में जुटे केजीएमयू-एसजीपीजीआई, आसान शब्दों में जानें क्या है ये सबकुछ

Thu, 24 Dec 2020 02:40 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 24 Dec 2020 02:40 PM IST
विज्ञापन
KGMU and SGPGI starts prepration for genome sequencing.
- फोटो : iStock

ब्रिटेन में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन मिलने के बाद एसजीपीजीआई और केजीएमयू जीनोम सीक्वेंसिंग की तैयारी में जुट गए हैं। इन्हें शासन से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। क्योंकि यह जांच काफी महंगी होती है। अभी तक यहां प्रायोगिक तौर पर ही जांच होती रही है। विस्तृत जांच के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को सैंपल भेजा जा रहा था।

विज्ञापन


आईसीएमआर सभी राज्यों से सैंपल मंगाकर जीनोम सीक्वेंसिंग कर रहा था। इससे वायरस के स्ट्रेन के बारे में जानकारी मिल जाती थी। हाल ही ब्रिटेन में आए नए स्ट्रेन की जानकारी के बाद जीनोम सीक्वेंसिंग बढ़ाने की तैयारी चल रही है। ब्रिटेन से आने वाले हर व्यक्ति के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग अनिवार्य कर दी गई है।
विज्ञापन


सूत्र बताते हैं कि केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जांच में आने वाले खर्च का भी आकलन किया गया है। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमिता जैन ने बताया कि अभी तक सैंपल को आईसीएमआर में भेजा जाता था, लेकिन सरकार का निर्देश होगा तो यूनिवर्सिटी यह जांच शुरू कर देगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

कर चुके हैं 100 सैंपलों की जीनोम सीक्वेंसिंग

एसजीपीजीआई व सीडीआरआई ने मिलकर करीब 100 सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग की थी। सूत्र बताते हैं कि राजधानी सहित आठ जिलों से आए सैंपल में भिन्नता नहीं पाई गई है। ज्यादातर मरीजों में दिल्ली में मिला ए-2-ए स्ट्रेन पाया गया है। इसका प्रभाव सामान्य बताया जा रहा है।

इस संबंध में एसजीपीजीआई की माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. उज्ज्वला घोषाल का कहना है कि यह जांच काफी महंगी होती है। ब्रिटेन से आने वाले सभी लोगों के सैंपल की जिनोम सीक्वेंसिंग की बात कही जा रही है।

शासन से निर्देश मिलने पर जीनोम सीक्वेंसिंग की जाएगी। अभी यहां प्रायोगिक तौर पर किया गया है। संबंधित सैंपल को आईसीएमआर भी भेजा गया है।

इन सवालों के जरिए आसान शब्दों में जानिए सबकुछ

सवाल- जीनोम सीक्वेंसिंग है क्या?
जवाब-
जीनोम किसी जीव की कुंडली है। जीव कैसा होगा, कैसा दिखेगा, यह सब कुछ जींस तय करते हैं। इन्हीं जींस के विशाल समूह को जीनोम कहते हैं। जींस की सीक्वेंसिंग जानने को ही जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं।

सवाल- स्ट्रेन क्या है?
जवाब-
स्ट्रेन को आसान शब्दों में जेनेटिक वैरिएंट कह सकते हैं। यह सबकुछ वैसे ही जैसे एक ही कंपनी की कारें अलग-अलग वैरिएंट में आती हैं। एक ही मॉडल के अलग-अलग वैरिएंट की क्षमता अलग-अलग होती है।

सवाल- अभी ये चर्चा में क्यों है?
जवाब-
हाल ही ब्रिटेन में कोरोना के नए एवं खतरनाक स्ट्रेन का पता चला। अब किसी में वायरस का वह स्ट्रेन तो नहीं इसके लिए उसकी कुंडली (जीनोम सीक्वेंसिंग) को खंगालना जरूरी होगा।

सवाल- इसके बारे में हमें जानने की जरूरत क्यों है?

सवाल- इसके बारे में हमें जानने की जरूरत क्यों है?
जवाब-
विशेषज्ञों का कहना है कि लैब में वायरस के आरएनए से उसके रूपांतरित होने के बारे में सटीक जानकारियां मिल सकती हैं। सीक्वेंसिंग से प्राप्त जानकारी से वैक्सीन के विकास में भी मदद मिल सकती है।

सवाल- इसका हमारे लिए संदेश क्या है?
जवाब-
अब तक कोरोना वायरस के 17 तरह के स्ट्रेन के बारे में जानकारी मिली है। अपने ही देश में करीब 10 तरह के स्ट्रेन पाए गए हैं। भारत में कोरोना का सबसे ज्यादा ए-2-ए स्ट्रेन मिला है। इसके अलावा बी-4, बी, ए-3-ए, ए-1-ए, बी-1, ए-3-आई, आदि भी पाए गए हैं। इनमें तेजी से फैलने वाले ए-3-आई को ज्यादा खतरनाक माना जाता है। किसी को भी यह बताया जाए कि कोरोना वायरस के इतने रूप सामने आ चुके हैं तो हम ज्यादा सजग रहेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed