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मरा जो लाल दंगे में वो वापस आ सकेगा क्या...
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Wed, 02 Oct 2013 11:14 AM IST
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चेतना साहित्य परिषद की ओर से मंगलवार को नाका के नंद निकेतन सभागार में
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काव्य संध्या सजी।
अध्यक्षता जगमोहन कपूर ने की, जबकि संचालन रामऔतार पंकज ने किया। रामशंकर वर्मा ने ‘कितने इंद्रधनुष खिल जाते तुम होती तो...’ सुनाया।
डॉ. हरिओम ओझा ने वीर रस के छंद मेरी मां को दूने हेतु तुमने बढ़ाये हाथ से तालियां बटोरी।
गोष्ठी की शुरुआत आशुतोष बाजपेई के मातृ स्तवन से हुआ, जबकि अशोक कुमार शुक्ल ने मुजफ्फरनगर दंगे की त्रासदी को उकेरा।
संगोष्ठी में कृष्णकांत झा, धीरज मिश्र, अरविंद कुमार झा ने भी रचनाएं सुनाईं।
अध्यक्षता जगमोहन कपूर ने की, जबकि संचालन रामऔतार पंकज ने किया। रामशंकर वर्मा ने ‘कितने इंद्रधनुष खिल जाते तुम होती तो...’ सुनाया।
डॉ. हरिओम ओझा ने वीर रस के छंद मेरी मां को दूने हेतु तुमने बढ़ाये हाथ से तालियां बटोरी।
गोष्ठी की शुरुआत आशुतोष बाजपेई के मातृ स्तवन से हुआ, जबकि अशोक कुमार शुक्ल ने मुजफ्फरनगर दंगे की त्रासदी को उकेरा।
संगोष्ठी में कृष्णकांत झा, धीरज मिश्र, अरविंद कुमार झा ने भी रचनाएं सुनाईं।