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‘बुझी हुई शमां को फिर जला गया कोई’
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Fri, 27 Sep 2013 08:03 AM IST
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लक्ष्य संस्था की ओर से गुरुवार को लक्ष्मण पार्क में काव्य गोष्ठी का
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आयोजन किया गया।
अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार राम राज भारती फतेहपुरी ने ‘हिंदी एक अमर भाषा है, ध्वनी धरती से आई है, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सबने महिमा गाई है’ पंक्तियां सुनाई।
इसके बाद रवि सारस्वत ने ‘बुझी हुई शमां को फिर जला गया कोई, टूटे हुए आइने में अक्स दिखा गया कोई...’ पंक्तियां पढ़ीं।
इसके बाद गीतकार आरके सरोज ने ‘बड़े शर्म की बात मनाना पड़ता है पखवारा...’, अनिल अनाड़ी ने ‘करता सबसे वंदना कर लो जरा विचार, पत्नी की पूजा करो तो सुखी रहे परिवार’ कविता सुनाकर वाहवाही लूटी।
इसके अलावा केके सिंह मयंक, मृत्युंजय प्रसाद गुप्त, मनमोहन बाराकोटी, संजीव मधुकर व राज कुमार उपाध्याय ने भी कविताएं पढ़ीं।
अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार राम राज भारती फतेहपुरी ने ‘हिंदी एक अमर भाषा है, ध्वनी धरती से आई है, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सबने महिमा गाई है’ पंक्तियां सुनाई।
इसके बाद रवि सारस्वत ने ‘बुझी हुई शमां को फिर जला गया कोई, टूटे हुए आइने में अक्स दिखा गया कोई...’ पंक्तियां पढ़ीं।
इसके बाद गीतकार आरके सरोज ने ‘बड़े शर्म की बात मनाना पड़ता है पखवारा...’, अनिल अनाड़ी ने ‘करता सबसे वंदना कर लो जरा विचार, पत्नी की पूजा करो तो सुखी रहे परिवार’ कविता सुनाकर वाहवाही लूटी।
इसके अलावा केके सिंह मयंक, मृत्युंजय प्रसाद गुप्त, मनमोहन बाराकोटी, संजीव मधुकर व राज कुमार उपाध्याय ने भी कविताएं पढ़ीं।