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घर मा भूजी भांग नहीं है, लेकिन लैपटॉप तो है..

Sun, 26 Jan 2014 11:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 26 Jan 2014 11:03 AM IST
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kavi sammelan

‘भीतर छपरा चुए टपाटप, बाहर से टीप टॉप तो है, घर मा भूजी भांग नहीं है,

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लेकिन लैपटॉप तो है...’ मौजूदा हालातों पर कटाक्ष करती बाराबंकी के हास्य कवि अनिल बौझड़ की इस कविता को खूब सराही गई।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को युवा साहित्य चेतना मंच की ओर से चौक के अग्रसेन इंटर कॉलेज में ‘जरा याद करो कुर्बानी’ कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

बाराबंकी से आए कवि विनय शुक्ला ने ‘उन्हें नमन जो बलिदानों की अमर गाथाएं छोड़ गए...’ सुनाया। लखनऊ के व्यंग्यकार अलंकार रस्तोगी ने कंबल बंटने में होती देर पर चुटकी ली।

उन्होंने सुनाया कि ये कुंभकरणीय नींद में सोता है प्रशासन भी कब जागेगा, पहले तो अपना कमीशन और फिर कंबल बांटेगा...’ से तालियां पाई।

हैदरगढ़ से आए ओज के कवि दुष्यंत सिंह ने वीररस से भरी कविताएं सुनाई। इस मौके पर विनय शुक्ला को ओजस्वी स्वर सम्मान से नवाजा ग

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