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‘मतलबी यार को तो पहचानिए जनाब...’
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Mon, 11 Nov 2013 09:56 AM IST
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चेतना साहित्य परिषद की ओर से रविवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ,
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जिसमें कवियों ने तमाम रसों से ओतप्रोत पंक्तियां पढ़ीं।
डॉ. आशुतोष बाजपेई ने वीर रस की कविता ‘बंधे रहोगे कब तक व्यर्थ अहिंसा की जंजीरों से, गदा युद्ध को मत भूलो परिचित हो धनुष वीरों से...’ सुनाया।
इसके बाद अरविंद कुमार झा ने हास्य छंद ‘मतलबी यार को तो पहचानिए जनाब...’, शिवराम तिवारी ने ‘चलते रहिए, बढ़ते रहिए...’ सुनाया।
इसके बाद सरस कपूर ने ‘आपन अंग काटि कै मइया जेहिके घाव पुरावा, भाई वाहिकै मुंह अंगार भरन जइबे...’ सुनाया।
इसके अलावा अशोक कुमार शुक्ल, कृष्णकांत झा, सुधांशु ने भी पंक्तियां सुनाईं।
डॉ. आशुतोष बाजपेई ने वीर रस की कविता ‘बंधे रहोगे कब तक व्यर्थ अहिंसा की जंजीरों से, गदा युद्ध को मत भूलो परिचित हो धनुष वीरों से...’ सुनाया।
इसके बाद अरविंद कुमार झा ने हास्य छंद ‘मतलबी यार को तो पहचानिए जनाब...’, शिवराम तिवारी ने ‘चलते रहिए, बढ़ते रहिए...’ सुनाया।
इसके बाद सरस कपूर ने ‘आपन अंग काटि कै मइया जेहिके घाव पुरावा, भाई वाहिकै मुंह अंगार भरन जइबे...’ सुनाया।
इसके अलावा अशोक कुमार शुक्ल, कृष्णकांत झा, सुधांशु ने भी पंक्तियां सुनाईं।