साहब! आतंकियों को भी अपने घरवालों से मिलने का कानून है तो हमें क्यों रोका जा रहा है: कश्मीरी महिला
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साहब आतंकियों को भी जेल में अपने घरवालों से मिलने का कानून है तो हमें क्यों नहीं मिलने दिया जा रहा है। हजारों किलोमीटर दूर से आकर हम अपने शौहर से मिलने के लिये बेटी के साथ पांच दिनों से जेल के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन हमारी कोई नहीं सुन रहा है।
रहम कर दो हम पर, मुलाकात नहीं तो दूर से ही एक झलक दिखा दो। बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे जेल गेट पर बिलखते हुए एक कश्मीरी महिला ने जेलर से मिलकर अपने पति से मुलाकात के लिए गुहार लगाई।
महिला ने जेलर से उसके बच्चों का वास्ता देकर बेटी की ही मुलाकात कराने का आग्रह किया। हालांकि, जेल प्रशासन ने किसी भी कश्मीरी से मुलाकात नहीं कराई। जेल प्रशासन ने बताया कि शासन से अनुमति मिलने के बाद ही मुलाकात होगी।
करीब छह दिनों में पहुंचे तीन दर्जन कश्मीरी
कश्मीर से जिला जेल लाए गए अलगाववादी से मुलाकात के लिए कश्मीर से उनके परिवारीजन पहुंच रहे हैं। तीन से छह दिनो में करीब दो दर्जन कश्मीरी जेल में बंद अलगाववादी से मुलाकात के लिए आ चुके हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बारामूला कश्मीर से आई सलमा (50) ने जेलर से कहा कि साहब आपके भी बच्चे होंगे। उन्हीं बच्चों का वास्ता। मेरी नहीं तो मेरी बेटी जायरा की ही मुलाकात उसके पिता से करा दीजिए। हम परेशान हैं, लेकिन जेल प्रशासन ने इन्कार कर दिया।
इसके अलावा कश्मीर से आए एक युवक ने खुद को जम्मू-कश्मीर पुलिस में तैनात होने का हवाला देकर जेल में बंद अपने वालिद से मुलाकात कराने को कहा। इनके अलावा बारामूला से मुलाकात करने आने वालों में मसूद व परे सहित करीब 12 कश्मीरी बृहस्पतिवार को अलगाववादियों से मिलने जेल पहुंचे थे।
शासन से सत्यापन के लिए भेजे गए पहचान पत्र
जेल प्रशासन ने कश्मीर से आए लोगों के मुलाकात न कराने के सवाल पर कहा कि वह सभी प्रार्थनापत्र के साथ आईडी लगाकर दें। प्रार्थनापत्रों को उनके राज्य में सत्यापन के लिए भेज कर मुलाकातियों का पता व उनकी पहचान कराई जाएगी। साथ ही शासन को भी अनुमति पत्र भेजा जाएगा। अनुमति मिलने पर ही मुलाकात हो पाएगी।