कल्याण सिंह : अयोध्या जरूर आएंगे.. एक दिन पहले ही आ जाएंगे.. पर नहीं आ पाए, जब एक दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजे गए
कोर्ट ने कहा- ‘अदालत की अवमानना ने देश के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने को प्रभावित किया है, इसलिए मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को सांकेतिक तौर पर एक दिन के लिए जेल भेजा जा रहा है। साथ ही 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है।’
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अयोध्या जरूर आएंगे.. एक दिन पहले ही आ जाएंगे.. । रामलला के दर्शन के लिए व्याकुलता भरा यह शब्द पिछले साल एक अगस्त को कल्याण सिंह का था। वे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से फोन पर राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन में पांच अगस्त को आने के लिए बात करते वक्त बेहद आतुर थे। लेकिन उनके स्वास्थ्य का हवाला देकर चंपत राय मनाने में खुद को असहाय सा दिख रहे थे। अब अयोध्या में 1992 के महानायक कल्याण सिंह के जाने से हर कोई व्यथित है, लोग खुद को अनाथ सा महसूस कर रहे हैं। साधु-संतों को मलाल है कि राम मंदिर फैसले के बाद कल्याण सिंह अयोध्या नहीं आ पाए। आम लोग कहते हैं कि कल्याण सिंह के आने पर अयोध्या में सिर्फ दीप ही नहीं जलाते, बल्कि ढोल नगाड़े बजाकर उत्सव मनता। लेकिन यह इच्छा अब सपना ही बनकर रह गई। कल्याण सिंह और अयोध्या का रिश्ता प्रभु राम और भक्त हनुमान जैसा था। 1992 की घटना के बाद मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का त्याग और बलिदान यह आज भी लोगों की जुबान पर है।
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास कहते हैं कि कल्याण सिंह के इंतजार में आम लोग ही नहीं बल्कि संत महंत पलक पावडे़ बिछाए बैठे थे, लेकिन आज उनके निधन की खबर से सबकी आंखें नम हैं। आज अयोध्या में बन रहा भव्य राम मंदिर के कर्णधार कल्याण सिंह ही हैं। अनी अखाड़ा हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास कहते हैं कि कल्याण सिंह कलयुग में हनुमान के अवतार जैसे थे। उनके पराक्रम से आज अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है। लेकिन कल्याण सिंह को राम मंदिर की भूमि पूजन में नहीं आने देना, सभी को खल रहा है। लोग उनका दर्शन पाने के लिए आतुर थे।
कल्याण सिंह मेरे बड़े भाई जैसे थे : कटियार
पूर्व राज्य सभा सांसद राम मंदिर के आंदोलन के नायकों में शामिल विनय कटियार उनके निधन से काफी दुखी हैं। बोले बोले कि कल्याण सिंह को मैं अपना बड़ा भाई मानता था। हमारी व कल्याण सिंह की जोड़ी उस 90 के दशक में काफी मशहूर थी। हम लोगों ने साथ-साथ कई सभाएं भी की। बताया कि 1992 में जब राम नगरी में लाखों की संख्या में संख्या में कारसेवक जुड़ गए थे तब मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने मुझसे साफ कहा था की हम निहत्थे कारसेवकों पर गोली नहीं चलाएंगे। सरकार अगर जाती है तो हमें कोई चिंता नहीं। जब 6 दिसंबर 1992 को कार सेवा हुई और बाबरी विध्वंस को कर दी गई तो कल्याण सिंह ने अपनी महानता का परिचय देते हुए इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसंबर, 1992 को ही मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। उनका आत्मबल और समर्पण आज भी हमें याद है।
इतिहास पुरूष कहलायेंगे कल्याण सिंह: चम्पत
राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा रहे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय उनके निधन पर स्तब्ध हैं। कहा कि बाबू कल्याण सिंह का देहावसान यद्यपि भारतीय समाज की अपूरणीय क्षति है तथापि भावी काल में वे इतिहास पुरुष कहलाएंगे।
अविस्मरणीय रहेगा कल्याण सिंह का महान त्याग व समर्पण: वेदांती
पूर्व सांसद डॉ रामविलास दास वेदांती ने कहा कि यदि कल्याण सिंह न होते तो विवादित ढांचा ना टूटता। विवादित ढांचा टूटने के बाद ही राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ। यदि आज राम मंदिर का निर्माण हो रहा है तो यह कल्याण सिंह के महान त्याग और समर्पण की ही देन है।
जब एक दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजे गए कल्याण सिंह
कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि बाबरी ढांचे को कोई नुकसान नहीं होने देंगे। लेकिन 6 दिसंबर, 1992 को कारसेवकों ने ढांचा गिरा दिया। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में कल्याण सिंह के खिलाफ अवमानना की अर्जी दाखिल की गई। ये अर्जी दाखिल की थी मोहम्मद असलम नाम के आदमी ने। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की सुनवाई की और फिर 24 अक्टूबर, 1994 को फैसला दिया। कोर्ट ने कहा- ‘अदालत की अवमानना ने देश के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने को प्रभावित किया है, इसलिए मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को सांकेतिक तौर पर एक दिन के लिए जेल भेजा जा रहा है। साथ ही 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है।’
कोर्ट के इस आदेश के बाद कल्याण सिंह को एक दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजा जाना था। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार एलसी भादू ने दिल्ली पुलिस के एक डीसीपी एचपीएस वर्क को बुलाया और कोर्ट के आदेश की तामील करने को कहा। लेकिन ये डीसीपी एचपीएस वर्क के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला था। फिर तिलक मार्ग थाने के एसएचओ को बुलाया गया और कोर्ट का आदेश तामील करने को कहा गया। तिलक मार्ग थाने के एसएचओ सुरक्षा के तामझाम के साथ कॉपरनिकस मार्ग पर बने यूपी भवन पहुंचे और वहां से कल्याण सिंह को लेकर तिहाड़ जेल के लिए निकले। उस वक्त तिहाड़ जेल की सुपरिटेंडेंट थीं किरण बेदी। किरण बेदी ये जानना चाहती थीं कि कल्याण सिंह को एक दिन की जेल का मतलब क्या है। यानी कि उन्हें किस वक्त से किस वक्त तक जेल में रखना है। किरण बेदी इस बात की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से करना चाहती थीं। सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया-‘किरण बेदी, आपको अपने सवाल के जवाब के लिए जेल का मैन्युअल देखना चाहिए’
और फिर कल्याण सिंह को एक दिन के लिए जेल में रखा गया, जो एक सांकेतिक सजा थी।