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...जब सेमिनार में मौलाना कल्बे सादिक ने कहा था-मछली पकड़ कर मत दीजिए पकड़ना सिखाइये
Wed, 25 Nov 2020 10:32 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 25 Nov 2020 10:32 AM IST
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शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक
- फोटो : amar ujala
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मौलाना डॉक्टर कल्बे सादिक ने 1976 में एक सर्वे कराया था जिसमें शिया समुदाय के लोगों का एक सर्वे कराया था जिसमें पूरे भारत में किस राज्य में शियों की कितनी आबादी है और किस जगह सबसे अधिक परेशानियां हैं। एक सेमिनार में उन्होंने कहा था कि भारत में शिया समुदाय अल्पसंख्यकों में भी अल्पसंख्यक है।
उन्होंने कहा कि जिस कौम के पास शिक्षा नहीं होती उसके पास कुछ नहीं होता। उनका कहना था कि पैसे खर्च कर देने से कुछ नहीं होता। दरिया के किनारे बैठे शख्स को मछली पकड़ कर मत दीजिए उसे मछली पकडना सिखाइये।
हरदोई के गरीब बच्चे को पढ़ने अमेरिका भेजा
मौलाना कल्बे सादिक का जोर हमेशा क्वालिटी एजुकेशन पर था। उनका कहना था कि एक हजार क्लर्क बनाने से बेहतर है 10 अफसर बन कर निकलें। उन्होंने हरदोई के एक गांव गौरी खालसा से आशिक अब्बास नाम के एक गरीब बच्चे का जब इंटरव्यू लिया तो उन्हें एहसास हुआ कि उसे अच्छी एजुकेशन मिले तो वह काफी आगे जा सकता है।
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1988 में एसे उन्होंने हरदोई से निकाल कर अमेरिका के एक बड़े स्कूल में एडमिशन कराया। जो बच्चा एक रंग की हवाई चप्पल नहीं पहन पाता था, वह अमेरिका में इस समय नामचीन कंप्यूटर इंजीनियर है। कल्बे सादिक का कहना था कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाए। एक हजार क्लर्क के बजाए 10 अफसर तैयार करें तो बेहतर होगा।
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उन्होंने कहा कि जिस कौम के पास शिक्षा नहीं होती उसके पास कुछ नहीं होता। उनका कहना था कि पैसे खर्च कर देने से कुछ नहीं होता। दरिया के किनारे बैठे शख्स को मछली पकड़ कर मत दीजिए उसे मछली पकडना सिखाइये।
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हरदोई के गरीब बच्चे को पढ़ने अमेरिका भेजा
मौलाना कल्बे सादिक का जोर हमेशा क्वालिटी एजुकेशन पर था। उनका कहना था कि एक हजार क्लर्क बनाने से बेहतर है 10 अफसर बन कर निकलें। उन्होंने हरदोई के एक गांव गौरी खालसा से आशिक अब्बास नाम के एक गरीब बच्चे का जब इंटरव्यू लिया तो उन्हें एहसास हुआ कि उसे अच्छी एजुकेशन मिले तो वह काफी आगे जा सकता है।
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1988 में एसे उन्होंने हरदोई से निकाल कर अमेरिका के एक बड़े स्कूल में एडमिशन कराया। जो बच्चा एक रंग की हवाई चप्पल नहीं पहन पाता था, वह अमेरिका में इस समय नामचीन कंप्यूटर इंजीनियर है। कल्बे सादिक का कहना था कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाए। एक हजार क्लर्क के बजाए 10 अफसर तैयार करें तो बेहतर होगा।
शिया सुन्नी एकता के लिए आयतुल्लाह शीस्तानी कल्बे सादिक को चुना मैसेंजर
यह बात शायद 2015 की है। मौलाना कल्बे सादिक इराक गए थे। वहां शियों के सबसे बड़े धर्मगुरु आयतुल्लाह शीस्तानी ने उन्हें बुलाया और कहा कि जाकर हिंदुस्तान के मुसलमानों से कह दो कि वह आपस में लड़ें नहीं, मिलकर रहें। सुन्नी समुदाय के लिए खास मैसेज देते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने भाई से बढ़कर अपनी जान समझें। मौलाना कल्बे सादिक ने इस बात का जिक्र कई सेमिनार और मजलिसों में किया।