मौलाना जव्वाद नोटबंदी पर मोदी के साथ, सपा के झगड़े को बताया ड्रामा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र की मोदी सरकार का एक हजार और पांच सौ के नोटों की बंदी का फैसला पूरी तरह राष्ट्र हित में है। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। कालाधन समाप्त होगा। मध्य और गरीब तबके का भला होगा। इस मामले में अगर कुछ कमी थी तो वह तैयारी।
पूरी व्यवस्था सहेजने के बाद ही नोटबंदी का कदम उठाना चाहिए था। आज परेशानी झेलने के बावजूद जनता देशहित में कष्ट सहते हुए रुपया पाने के लिए लाइन में खड़ी हो रही है।
बुधवार को यह बातें शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने राठहवेली के इमामबाड़ा जवाहर अली में कहीं। वह कर्बला के 72 शहीदों के शबीहे ताबूतों के जियारत कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। सवालों के जवाबों में उन्होंने कहा कि सपा परिवार में जो कुछ हुआ, वह ड्रामा था या झगड़ा?
यह वाकई में आपसी झगड़ा था या फिर अखिलेश यादव को जनता के बीच और बेहतर तरीके से इंट्रोड्यूज करने का तरीका? मामला चाहे जो कुछ भी रहा हो इससे सपा को नुकसान हुआ है और आम जनता का इस पार्टी पर विश्वास डिगा है।
'जनता की नब्ज पता चलने पर सब अलग हुए'
शिया धर्मगुरु ने नोटबंदी के फैसले के खिलाफ संसद के भीतर और सड़क पर हो रहे विरोध पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि ‘भारत बंद’ को लेकर भाजपा विरोधी दलों ने पहले एकजुटता दिखायी।
जब जनता की नब्ज का पता चला तो एक-एक दल अलग-थलग होने लगे। हालात ऐसे हुए कि 28 नवंबर के भारत बंद को लेकर कांग्रेस का समर्थन करने वाली सपा, बसपा और ममता की तृणमूल कांग्रेस ने भी उसका साथ नहीं दिया।
बंद कराने के बजाय सड़क पर अलग-अलग उतरकर मार्च व विरोध प्रदर्शन हुआ। इससे कांग्रेस की छवि खराब ही हुई है। इस दौरान मोहर्रम संचालन कमेटी के अध्यक्ष मुनीर आब्दी, सचिव वसी हैदर गुड्डू, जाकिर हुसैन पाशा आदि थे।