यूपी में बढ़ेगी न्याय मिलने की रफ्तार, कैसे?
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सूबे में बढ़ते अपराध और लंबित मुकदमों की भारी संख्या के बीच पीड़ितों को तेजी से न्याय दिलाने के मोर्चे पर बीते दो साल काफी अहम रहे।
इस बीच महिलाओं को तेजी से न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के फैसले के साथ पारिवारिक विवाद व भ्रष्टाचार से जुड़े मुकदमों की सुनवाई कर दोषियों को सजा दिलाने के लिए 300 से ज्यादा विशेष न्यायालयों के गठन का फैसला हुआ।
इनमें तमाम अदालतों ने अपना विधिवत कामकाज भी शुरू कर दिया है। क्योंकि, प्रदेश में पारिवारिक मामलों की तादाद भी बहुत ज्यादा होती है इसलिए इससे जनता को लाभ निश्चित तौर पर पहुंचेगा।
पहले 12 जिलों में ही थीं अदालतें
दो साल पहले तक पारिवारिक वादों के तेज निपटारे के लिए केवल आजमगढ़, मेरठ, फैजाबाद, आगरा, बरेली, मुरादाबाद, गोरखपुर, वाराणसी, झांसी, इलाहाबाद, लखनऊ व कानपुर नगर में ही पारिवारिक न्यायालय थे।
मौजूदा सरकार ने एकमुश्त 62 पारिवारिक न्यायालयों की स्थापना की। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों के निस्तारण के लिए एकमुश्त 22 विशेष न्यायालयों की स्थापना हुईं।
सीबीआई की छह विशेष कोर्ट की स्थापना का काम हुआ। इसके अलावा 113 तहसीलों में ग्राम न्यायालयों की स्थापना का फैसला किया गया है।
इनमें से 12 के गठन की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। बाकी को लेकर कार्यवाही चल रही है। इससे आम वादकारियों को अपने पास की तहसील में ही न्याय मिल सकेगा।
...ताकि तेजी से मिले पीड़ितों को न्याय
प्रमुख सचिव न्याय एसके पांडेय कहते हैं कि मौजूदा सरकार ने करीब 350 नए न्यायालयों के गठन का फैसला किया है।
इनमें से काफी न्यायालयों में न्यायिक काम शुरू हो चुका है। जहां अभी कामकाज शुरू नहीं हुए हैं वहां जरूरी स्टाफ के पदों के सृजन व अवस्थापना सुविधाओं के विकास की कार्यवाही तेजी से चल रही है।
ये हैं कुछ खास बातें
-80 फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का फैसला। महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की होगी सुनवाई।
-62 जिलों में पारिवारिक न्यायालय , भ्रष्टाचार के मामलों के लिए 22 विशेष अदालतें
-113 ग्राम न्यायालयों के गठन का फैसला। 12 के गठन की अधिसूचना जारी।