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Lucknow News : उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति ने कहा, अपील लंबित होने की वजह से कोई लंबे समय तक जेल में न रहे
Sun, 22 Jan 2023 09:58 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sun, 22 Jan 2023 09:58 PM IST
सार
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने और उनके पुनर्वास की व्यवस्था कराने पर जोर दिया। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि अनावश्यक प्रशासनिक या कानूनी तकनीकियों की वजह से विचाराधीन कैदियों की दैहिक स्वतंत्रता बाधित न हो।
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जस्टिस संजय किशन कौल
विस्तार
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि हमें मामलों को जल्दी निपटाने के साथ यह भी देखना है कि कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक जेल में इसलिए बंद न रहे कि उसके मामले का विचारण अथवा अपील न्यायालय में लंबित चल रही है। वह रविवार को प्राधिकरण की ओर से वाराणसी में आयोजित सुगम न्याय प्राप्ति विषय उत्तर क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने और उनके पुनर्वास की व्यवस्था कराने पर जोर दिया। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि अनावश्यक प्रशासनिक या कानूनी तकनीकियों की वजह से विचाराधीन कैदियों की दैहिक स्वतंत्रता बाधित न हो। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने गिरफ्तारी से पहले, गिरफ्तारी के बाद और रिमांड के दौरान व्यक्ति के अधिकार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न राज्यों की जेलों की स्थिति की चर्चा करते हुए कहा जेलों के सुधार की जरूरत है। उन्होंने सम्मेलन में हिस्सा ले रहेे 11 राज्य के न्यायधीशों और अन्य लोगों से अपील की कि जेलों में निरुद्ध बंदियों की संख्या कम करने के लिए उपयुक्त मामलों में परिवीक्षा प्रदान की जाए।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने क हा कि विधित साक्षरता के प्रसार में कानून के भात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है। वे समाज के वंचित वर्ग को न्याय तक पहुंच प्रदान करने का मजबूत साधन बन सकते हैं। उत्तर प्रदेश में प्री लिटिगेशन मीडिएशन के उपयोग केसकारात्कम परिणामों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आर्बिटेशन, एनआई एक्ट, लघु अपराधिक वादों एवं पारिवारिक विवादों के लिए आयोजित होने वाले लोक अदालतों के परिणाम उत्साहजनक हैं। इस दौरान न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा आदि ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में पंजाब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा तैयार की गई इनसाइड पंजाब प्रिजन्स: स्टडी ऑफ द कंजीशंस ऑफ प्रिजंस इन पंजाब नामक शोध रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इस दौरान विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही विभिन्न न्याय प्रणाली की मौजूदा स्थिति एवं भविष्य की चुनौतियों की पहचान केलिए अपनाए जा रहे तरीकों को भी प्रस्तुत किया गया।
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