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Lucknow News: जंक फूड बढ़ा रहा अनियमित माहवारी और बांझपन की समस्या

Thu, 11 Dec 2025 02:41 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Dec 2025 02:41 AM IST
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Junk food is increasing the problem of irregular menstruation and infertility

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लखनऊ। किशोरियों, युवतियों व महिलाओं में अनियमित माहवारी से जुड़ीं समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे की मुख्य वजह जंक फूड के अत्यधिक सेवन और खराब जीवनशैली को मान रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जंक फूड में ज्यादा मात्रा में रिफाइंड शुगर, अस्वस्थ और प्रोसेस्ड कार्ब्स होते हैं जिससे अप्राकृतिक रूप से हार्मोनल बदलाव होते हैं। इससे पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओडी) का खतरा बढ़ता है।

केजीएमयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग क्वीन मेरी की डॉ. रेखा सचान बताती हैं कि हार्मोनल बदलाव से माहवारी की अनियमितता के साथ किशोरियों के चेहरे पर बाल और आदमियों जैसी भारी आवाज की समस्या देखने को मिल रही है। ओपीडी में रोज 10-15 पीसीओडी के मामले आते हैं। इनमें दो से तीन किशोरियों में चेहरे पर असामान्य बाल और भारी आवाज की समस्या होती है। दूसरी ओर, 30-40 वर्ष की महिलाओं में बांझपन की समस्या बढ़ रही है। इसी वजह से गर्भाशय या सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
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जानिए, क्या है पीसीओडी

पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज एक हार्मोनल समस्या है, जिसमें महिलाओं के अंडाशय में कई छोटे-छोटे सिस्ट (गांठें) बन जाते हैं, जो अपरिपक्व अंडों के कारण होते हैं। इससे मासिक धर्म चक्र अनियमित होता है। शरीर में पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) बढ़ता है, जिससे वजन बढ़ना, चेहरे पर बाल आना, मुंहासे और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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जंक फूड का सेहत पर प्रभाव



- महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का उत्पादन असामान्य रूप से बढ़ जाता है।

- किशोरियों के चेहरे पर असामान्य बाल उगने लगते हैं और आवाज भारी होने लगती है।

- मासिक धर्म चक्र अनियमित हो जाता है। इससे कई तरह की अन्य समस्याएं होती हैं।



- याददाश्त कमजोर होती है। पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

- मोटापा बढ़ता है, जिससे गर्भधारण में दिक्कत होती है।



- टाइप-2 मधुमेह और हृदय संबंधी रोगों का जोखिम भी बढ़ जाता है।

सही जीवनशैली और खानपान है समाधान

डॉ. रेखा सचान कहती हैं कि सही जीवनशैली और खानपान से ही समस्या से निजात मिल सकती है। यदि कोई समस्या नहीं भी है तो भी जीवनशैली को सही रखें। जितना कम हो सके तले-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन करें। अपनी डाइट में फाइबर युक्त साबुत अनाज, फल, हरी सब्जियां शामिल करना चाहिए। चाहे कितना भी व्यस्त रहें, व्यायाम के लिए 30-40 मिनट जरूर निकाले। इन्हीं नियमों का पालन करके ही समस्या से बचा जा सकता है।
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