ये कैसे 'भगवान', ट्रॉमा से धक्के मारकर निकाले मरीज
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केजीएमयू, ट्रॉमा सेंटर में जूनियर डॉक्टर सोमवार को भी लगातार तीसरे दिन
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते अभी तक कुल 13 मरीजों की मौत हो चुकी है। सोमवार को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती पांच मरीजों की इलाज और दवा के अभाव में मौत हो गई।
तो ट्रॉमा सेंटर से बलरामपुर रेफर किए गए दो मरीज और ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों ने गेट के सामने ही दम तोड़ दिया।
कई मरीजों की मौत पर भी जूनियर डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में दो मरीजों की मौत की सूचना है हालांकि अस्पताल प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
ट्रॉमा सेंटर का हाल यह था कि दर्द से
तड़पते मरीजों को ट्रॉमा के वार्डों में तैनात डॉक्टरों ने दवा देने से मना
कर दिया। किसी ने डॉक्टर से सम्पर्क के पास गया तो उसे ये कहकर भगा दिया
कि इलाज चाहिए तो मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाओ नहीं तो यहां पर मरीज की
मौत पक्की है।
सोमवार को 280 बेड के ट्रॉमा
सेंटर में बीस से पच्चीस मरीज ही रह गए। बाकी सभी मरीजों को दूसरे अस्पताल
भेजने का दबाव बनाया जिसके बाद शाम चार बजे तक ट्रॉमा सेंटर खाली हो गया।
भूतल पर बने आर्थोपेडिक वार्ड में सभी मरीजों को जूनियर डॉक्टरों ने बाहर
निकाल दिया गया। वार्ड में भर्ती नेपाल के अर्जुन झिलको (40) का कुछ दिन
पहले सड़क हादसे में पैर टूट गया था।
पत्नी तुलसी ने बताया कि शनिवार को
भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने लकड़ी की खपच्ची बांधकर इलाज बंद कर दिया।
सोमवार सुबह अर्जुन दर्द के मारे तड़पने लगे।
पत्नी ने इमरजेंसी में मौजूद
डॉक्टरों से कहा तो उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। ट्रॉमा
सेंटर, केजीएमयू और क्वीन मेरी में हड़ताल के चलते काफी मरीज सिविल,
बलरामपुर, लोहिया समेत महिला अस्पताल पहुंच गए जिससे वो पूरी तरह से फुल
हो गए।
क्वीन मेरी अस्पताल में सोमवार को भर्ती बंद होने से काफी संख्या
में गर्भवती महिलाएं झलकारीबाई व डफरिन पहुंची जिससे वहां बेड फुल हो गए।