40 साल पहले भी लागू हुई थी पुलिस आयुक्त प्रणाली, बीच रास्ते से ही वापस बुला लिए गए थे कमिश्नर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा और लखनऊ में लागू होने वाली कमिश्नर प्रणाली, जिसकी चर्चा इन दिनों जोर-शोर से हो रही है उसे आज से 40 साल पहले भी लागू किया गया था। इसके लिए कानपुर को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया था। एसवीएम त्रिपाठी वहां के पहले पुलिस आयुक्त बनाकर भेजे गए थे, लेकिन वह गंगा घाट पर पहुंचे ही थे कि वहां कानपुर से आए विशेष मैसेंजर ने उन्हें सरकार के आयुक्त प्रणाली लागू होने के आदेश के निरस्त होने की जानकारी दी।
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह बताते हैं कि 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद प्रदेश में पहली बार पुलिस आयुक्त प्रणाली पर चर्चा शुरू हुई थी। 1979 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राम नरेश यादव ने इसपर निर्णय भी ले लिया और कानपुर में एसवीएम त्रिपाठी को बतौर पहला पुलिस आयुक्त बनाकर वहां भेजा भी गया, लेकिन त्रिपाठी कानपुर पहुंचते और जॉइन करते इससे पहले ही आईएएस लॉबी के भारी दबाव के बाद सरकार ने अपना निर्णय बदल दिया। त्रिपाठी को बीच रास्ते से वापस बुला लिया गया। इसके बाद चर्चा बहुत हुई लेकिन आईपीएस लॉबी कभी भी इस मुद्दे पर अपनी बात सरकार को समझा नहीं पाई।
मुख्यमंत्री ने 2017 में ही मांगा था प्रस्ताव
2014 में डीजीपी रिजवान अहमद ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को प्रस्ताव सौंपा, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चला गया। 2017 में जब प्रदेश में भाजपा सरकार बनी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्कालीन डीजीपी जावीद अहमद से पुलिस कमिश्नर प्रणाली के बारे में जानकारी हासिल की थी। उसी समय मुख्यमंत्री ने इसका प्रस्ताव भी मांगा था, लेकिन कुछ ही दिन बाद जावीद अहमद का स्थानांतरण हो गया और प्रस्ताव पर काम फिर रुक गया।
दूसरे चरण में कानपुर में लागू हो सकती है कमिश्नर प्रणाली
पहले पांच जिलों में एक साथ कमिश्नर प्रणाली लागू करने पर चर्चा थी। इसमें लखनऊ और नोएडा के अलावा कानपुर, वाराणसी और गाजियाबाद का प्रस्ताव तैयार हो रहा था, लेकिन नोएडा के एसएसपी द्वारा गुप्त सूचना लीक किए जाने की खबर के बाद इसे फौरन लागू करने का निर्णय लिया और पहले चरण में लखनऊ और गौतमबुद्घ नगर का चयन किया गया। अगले चरण में कानपुर, वाराणसी और गाजियाबाद में इसे लागू किया जा सकता है।