'सरकारी दामाद' का खजाना देख चौंधिया गए जौहरी!
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आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह के तीन बैंक लॉकरों को गुरुवार को खोला। इन लॉकरों से भारी मात्रा में ज्वैलरी मिली है, जिसे देख जौहरियों की भी आंखें चुंधिया गईं। विंग ने सोने, चांदी और हीरे के जेवरों की जांच के लिए बुलाया था। करीब पांच घंटे तक लॉकरों को खंगालने का काम जारी रहा।
लॉकरों की जांच से यादव सिंह की काली कमाई की फेहरिस्त लंबी हो रही है। आधा दर्जन से ज्यादा लॉकर खोले जा चुके हैं। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आयकर विभाग ब्योरा देगा।
सूत्रों के मुताबिक, लॉकरों से फर्जी कंपनियों के दस्तावेज, शेयरों में निवेश के रिकॉर्ड के अलावा भ्रष्टाचार के खेल में शामिल अफसरों, नेताओं और रीयल एस्टेट कारोबारियों की अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। सूत्रों के अनुसार, लॉकरों से मिल रही अकूत संपत्ति का हिसाब-किताब जानने के लिए बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
अब सबको ठीक करना ही पड़ेगा : सीएम
नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह की रोजाना सामने आ रही कारगुजारियों ने राज्य सरकार को भी सकते में डाल दिया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंचे। उन्होंने अपने विश्वासपात्रों से वहां के अफसरों और नेताओं की असलियत के बारे में पूछा।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने यादव सिंह के बारे में पूछा कि किस व्यक्ति का उसको संरक्षण रहा और क्यों ऐसी स्थिति बनी, इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सबको ठीक ही करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री के रुख से माना जा रहा है कि नोएडा में जल्द ही बड़े स्तर पर उलटफेर होने वाला है। सरकार यादव सिंह के मामले की सतर्कता जांच भी करा सकती है।
राष्ट्रीय लोकदल ने राज्यपाल से नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह को तत्काल निलंबित या बर्खास्त कर नोएडा में हुए घोटालों की जांच सीबीआई से कराने और उनके संरक्षणदाताओं को जांच के दायरे में लाने की मांग की है।
रालोद नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बृहस्पतिवार को प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान के नेतृत्व में राज्यपाल राम नाईक से मिला। उन्होंने प्रदेश में व्याप्त आर्थिक भ्रष्टाचार, जमीन घोटालों, बदहाल कानून व्यवस्था तथा किसानों की समस्याओं के संबंध में उन्हें पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
यादव सिंह सिंडीकेट का छापा हुआ हाई-प्रोफाइल
आयकर विभाग ने छापामारी और असेसमेंट रिपोर्ट बनाने के बाद नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह के सिंडीकेट पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है।
यादव सिंह के घर एवं लाकरों से निकली डायरी का प्रकरण हाई-प्रोफाइल होने की वजह से आयकर अफसर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। अफसरों ने असेसमेंट रिपोर्ट की गहन समीक्षा की और रवींद्र सिंह टोंगर सहित नोएडा अथॉरिटी के चारों अफसरों की छापामारी की फाइलों को खंगाला।
आयकर विभाग की जांच इकाई के महानिदेशक कृष्णा सैनी गुरुवार सुबह नोएडा से लखनऊ पहुंचे। वह एक से तीन दिसंबर तक नोएडा में रुक कर छापामारी एवं यादव सिंह प्रकरण की तहकीकात कर रहे थे।
गुरुवार को सैनी से मीडिया ने बात करनी चाही लेकिन उन्होंने काफी व्यस्त होने की बात कहकर मिलने से इन्कार कर दिया। महानिदेशक ने सबसे पहले मुख्यालय के अफसरों के साथ बैठक की। इसके बाद यादव सिंह सिंडीकेट की छापामारी की असेसमेंट रिपोर्ट की समीक्षा हुई।
नोएडा अथॉरिटी में 11 मई 2012 को पड़े छापे में चार बड़े अफसर रवीन्द्र सिंह टोंगर, ललित विक्रम, रामपाल वर्मन और एसएसए रिजवी की जांच रिपोर्ट की फाइलों को भी खंगाला गया। सूत्र बताते हैं कि इस छापामारी में शामिल अफसरों से भी चर्चा हुई।
सरकार को जल्द भेजी जाएगी रिपोर्ट
यादव सिंह सिंडीकेट की जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को जल्दी ही भेजे जाने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार वैसे आयकर विभाग को जांच रिपोर्ट देने के लिए दो महीने की मोहलत मिलती है। राज्य सरकार को दी जाने वाली रिपोर्ट में यादव सिंह और रवींद्र सिंह टोंगर सहित चारों अफसरों और उनकी पत्नियों की कंपनियों का पूरा विवरण रहेगा।