इस कैंपस में जींस, टी-शर्ट नहीं, लॉन्ग स्कर्ट चलेगा
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ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती उर्दू-अरबी-फारसी विश्वविद्यालय में स्टूडेंट जींस, टी-शर्ट पहनकर नहीं आ सकेंगे। स्पोर्ट्स शूज पहनने पर भी मनाही है।
उन्हें पैंट-शर्ट और लेदर शूज पहनकर ही आना होगा। लड़कियों के लिए भी ड्रेस कोड तय कर दिया गया है। वे सलवार सूट, साड़ी या लांग स्कर्ट ही पहन सकेंगी।
विश्वविद्यालय ने सोमवार से शुरू हुए अपने पहले सत्र में यह नया ड्रेस कोड लागू कर दिया है। विश्वविद्यालय में सत्र के पहले ही दिन सभी छात्र-छात्राओं को इस नए ड्रेस कोड की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि यहां पर जींस व टी-शर्ट पहनने पर रोक है।
वे ऐसे कपड़े पहनकर आएं जो औपचारिक पहनावा हो जैसे पैंट-शर्ट, सलवार शूट, साड़ी, लांग स्कर्ट। वहीं स्पोर्ट्स शूज पहनकर नहीं आना है बल्कि इसकी जगह लेदर के जूते ही पहनकर आना है।
कुछ और भी सलीके सिखाए जाएंगे
इसके अलावा विश्वविद्यालय के अन्य नियम और कायदे-कानूनों की जानकारी भी छात्र-छात्राओं को दी गई। हालांकि इस बाबत विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि छात्र-छात्राओं को अभी से कॉरपोरेट कल्चर सिखाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
अभी उन्हें उठने-बैठने, बातचीत करने और खाने-पीने का सलीका भी सिखाया जाएगा। विश्वविद्यालय में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई करवाई जाएगी। हालांकि उर्दू सीखना भी अनिवार्य है और जो इसे माध्यम के तौर पर लेना चाहें तो वे भी ले सकते हैं।
क्यों लागू हुई ये नई व्यवस्था?
कुलपति अनीस अंसारी का कहना है कि ऐसा नहीं है कि जींस-टी-शर्ट व स्पोर्ट्स शूज पहनने में बुराई है। हमारी कोशिश यह है कि छात्र-छात्राओं को प्रोफेशनलिज्म का सबक सिखाया जाए।
यहां पढ़ाई के साथ-साथ स्टूडेंट को कपड़े पहनने, उठने-बैठने और खाना-पीना खाने का सलीका भी सिखाया जाएगा। ताकि वह कारपोरेट जगत में कहीं भी नौकरी हासिल करने जाएं तो उन्हें झिझक महसूस न हो। उन्हें एक्सपर्ट द्वारा स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी।
यहां पर पूरी पढ़ाई अंग्रेजी मीडियम या फिर उर्दू में ही करवाई जाएगी। हर स्टूडेंट को उर्दू सीखना अनिवार्य है और उसे छह महीने का फाउंडेशन कोर्स करवाया जाएगा। अंग्रेजी मीडियम में ही पढ़ाई इसलिए कराई जा रही है ताकि आगे जॉब हासिल करने में स्टूडेंट को दिक्कत न हो।
यूनिवर्सिटी में फाइव-डे स्टडीज
कुलपति अनीस अंसारी कहते हैं कि 19 अगस्त का दिन उनके लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि वे एक नए चैलेंज को पूरा करने के लिए अपना मिशन शुरू करने जा रहे हैं। सिलेबस को डिजाइन करते समय मार्केट की डिमांड का पूरा ख्याल रखा गया है। यहां जो कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं उनका सिलेबस पूरी तरह अपडेट है।
यूनिवर्सिटी में सुबह 9:30 बजे से शाम 5 बजे तक पढ़ाई करवाई जा रही है। यही कारण है कि यहां पर फाइव डे वीक है यानी हफ्ते में पांच दिन ही क्लासेज लगेंगी।
फिलहाल यहां पर प्रतिदिन क्लासेज पढ़ने पर सख्ती है इसका असर पहले ही दिन कैंपस में देखने को मिला। अभी यहां पर 350 से अधिक स्टूडेंट दाखिला ले चुके हैं और प्रक्रिया अभी जारी है।