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रालोद नेता जयंत ने अखिलेश यादव से की मुलाकात, सवर्ण आरक्षण को बताया चुनावी जुमला

Tue, 08 Jan 2019 05:57 PM IST
MANISH sachan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: MANISH sachan Updated Tue, 08 Jan 2019 05:57 PM IST
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jayant chaudhary meets akhilesh yadav.
सपा अध्यक्ष से मुलाकात करते जयंत चौधरी

सपा व बसपा में गठबंधन की चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी मंगलवार को लखनऊ पहुंचे और उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के पीछे भाजपा विरोधी मतों को एकजुट करने की अखिलेश की कोशिश है। मुलाकात समाजवादी पार्टी मुख्यालय पर हुई।

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अखिलेश और जयंत ने लगभग दो घंटा बंद कमरे में गुफ्तगू की। कमरे से बाहर निकलने के बाद जयंत ने पत्रकारों के सवाल पर कहा कि वह गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। जब मिलकर चुनाव लड़ना है, भाजपा का विरोध करना है तो मिलना-जुलना और बैठकें करना जारी ही रहेगा।
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सीटों के बंटवारे पर अभी कोई बात नहीं हुई है। जब मिलकर चुनाव लड़ना तय है तो सीटें भी तय हो जाएंगी। पर, सूत्र बताते हैं कि सीटों को लेकर भी बातचीत हुई है। रालोद ने छह सीटों पर लड़ने में दिलचस्पी दिखाई है। पिछले दिनों सपा-बसपा गठबंधन में दो-तीन सीटें रालोद को देने की बात सामने आई थी।

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सीबीआई का दुरुपयोग, चुनावी जुमला है सवर्ण आरक्षण

जयंत ने कहा कि अखिलेश के साथ काफी अच्छे और दोस्ताना माहौल में बातचीत हुई। देश की दिशा और दशा एवं राजनीतिक परिस्थितियों पर पर बातचीत हुई। भाजपा की नीतियों से हो रहे नुकसान पर भी चर्चा हुई। रालोद नेता ने कहा कि सवर्ण आरक्षण भाजपा का चुनावी जुमला है। भाजपा हमेशा इस तरह की चाल चलती है। घोषणाएं करके उन्हें बीच में छोड़ देती है।

संवैधानिक संस्थाओं पर भी सवाल उठाती है। सीबीआई, न्यायपालिका और मीडिया के लिए जैसे लोकतंत्र की आवश्यकता जरूरी थी। भाजपा ने वैसा नहीं किया। भाजपा सरकार सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है। भाजपा के खिलाफ लड़ाई में रालोद पूरी तरह समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के साथ है।

रालोद की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी पकड़

राष्ट्रीय लोकदल की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी पकड़ मानी जाती है। पिछले दिनों कैराना में सपा, बसपा और रालोद के अघोषित गठबंधन के प्रयोग ने भाजपा को पटकनी दे दी थी। इस सीट से रालोद के टिकट पर तबस्सुम हसन जीतीं थीं। माना जाता है कि इसी प्रयोग को अब ये दल मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस मुलाकात में चौधरी ने पांच-छह सीटें रालोद को देने की मांग की।

इनमें चौधरी अजित सिंह की परंपरागत सीट बागपत, खुद जंयत की सीट मथुरा शामिल हैं। इसके अलावा रालोद की तरफ से कैराना, मुजफ्फरनगर, अमरोहा और बुलंदशहर की गणित का हवाला देते हुए इन पर रालोद के उम्मीदवार लड़ाने का आग्रह किया गया है। हालांकि जयंत ने कहा कि सीटों पर अभी कोई बात नहीं हुई है। पर, यह तय है कि रालोद सपा और बसपा गठबंधन के साथ लड़ेगा और इसे मजबूत करेगा।

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