टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज श्रीनाथ ने बताए, कैसे बनाएं अच्छा कॅरिअर
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‘आप युवा लोग टीवी पर अपने चहेते खिलाड़ियों को खेलते देखते हैं, खासकर टी-20 में बल्लेबाज के जोरदार शॉट्स को गौर से देखते हैं और नेट्स में जाकर उसकी प्रैक्टिस करते हैं। क्या पता किसी मैच में आपको वह शॉट आजमाने का मौका मिले और बढ़िया खेले तो बड़े स्तर पर अवसर मिल जाए। यही रणनीति पढ़ाई के समय भी अपनानी चाहिए।
यदि इंजीनियरिंग कर रहे हैं तो फिर भविष्य में आपके क्षेत्र में क्या होने जा रहा है, इसके बारे में पढ़ते रहिए। अपनी नॉलेज बढ़ाइए। आपका यह ज्ञान कोर्स पूरा होने के बाद खुद नौकरियां दिलाएगा।’
वन डे क्रिकेट में देश के लिए सर्वाधिक विकेट लेने वाले पूर्व क्रिकेटर जवागल श्रीनाथ ने इस उदाहरण के साथ युवाओं को अपने क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने की सीख दी।
खुद इंजीनियरिंग छात्र रहे श्रीनाथ ने डॉ. कलाम मेमोरियल यूथ कॉन्क्लेव में बताया कि हाल में उन्होंने एक लेख पढ़ा। इसमें एक कार कंपनी अपने कारों में ऐसा डिवाइस लगाने जा रही है, जिससे उसे अपने ग्राहक की कार की स्थिति लगातार मालूम होती रहेगी। कार में कोई खराबी होने पर यह डिवाइस कंपनी को सूचित कर देगा और कंपनी गाड़ी बीच रास्ते में खराब होने पर ग्राहक की मदद कर सकेगी।
श्रीनाथ ने कहा, जो स्टूडेंट्स ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग कर रहे हैं, वे इस तकनीक के बारे में ज्यादा पढ़ें। हो सके तो अपने कॉलेज में इस पर प्रोजेक्ट बनाएं। यह उन्हें ऐसा इंजीनियर बनने में मदद करेगा जो इंडस्ट्री को चाहिए। फिर उन्हें नौकरी तलाशनी नहीं पड़ेगी, कंपनियां खुद उन्हें तलाशेंगी।
मैंने सात साल में की इंजीनियरिंग
बैकलाग की वजह से सेमेस्टर में पीछे रह जाने वाले इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स का उत्साह बढ़ाते हुए श्रीनाथ ने बताया कि खुद उन्हें इंस्ट्रूमेंटेशन में इंजीनियरिंग करने में सात साल लग गए थे। पढ़ाई के दौरान क्रिकेट टीम में चुन लिए गए और कोर्स बीच में रुक गया। फिर एक बार जब हाथ जख्मी हुआ और क्रिकेट से कुछ समय के लिए अलग रहे तो इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
हमारी खोज को दुनिया भर की टीमों ने अपनाया
श्रीनाथ ने बताया कि इंजीनियरिंग पढ़ते समय ही उन्हें फाइनल सेमेस्टर के कंप्यूटर साइंस के विद्यार्थियों के जरिये कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर्स की जानकारी हुई जो खेलों के लिए बने हैं। इनके जरिये हर एक गेंद का न केवल रिकॉर्ड रखा जा सकता था, बल्कि उसका विश्लेषण भी दर्ज किया जा सकता था।
एक वन डे मैच में फेंकी जाने वाली करीब 620 (अमूमन 20 वाइड या नो बॉल मिलाकर) गेंदों में कौन सी गेंद पर क्या हुआ, गेंद लेग में गई या ऑफ में, स्पीड, लाइन लेंथ, बैट्समैन ने कैसा खेला, परिणाम क्या हुआ आदि लगभग हर जानकारी सॉफ्टवेयर दर्ज कर लेता था। उन्होंने 1999-2000 में यह सॉफ्टवेयर अपनी टीम को बताया। इससे पहले आमतौर पर वीएचएस टेप पर अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी देखना बेहद उबाऊ होता था।
टीम मीटिंग में जब ये टेप दिखाए जाते तो खिलाड़ी उठ कर चले जाते। लेकिन यह सॉफ्टवेयर आने से विश्लेषण बहुत प्रभावी हो गया और टीम मीटिंग में सभी को मजा आने लगा। अगले कुछ महीनों में इंग्लैंड से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक सभी टीमें भारतीय टीम की देखा देखी इस सॉफ्टवेयर को अपना चुकी थीं।
हमेशा तैयार रखो प्लान बी
श्रीनाथ ने कहा, कॅरिअर को लेकर युवा हमेशा अपने लिए प्लान बी तैयार रखें। जो लोग स्पोर्ट्स में आना चाहते हैं, वे यहां रोजी-रोटी चलाने की उम्मीद में न आएं। एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर वे क्रिकेटर नहीं बनते तो कहीं इंजीनियर बनकर काम कर रहे होते। यह उनका प्लान बी था।
हमारे यहां मजदूर माना जाता है गेंदबाज
पाकिस्तान के मुकाबले देश में अच्छे तेज गेंदबाज नहीं निकलने पर उन्हाेंने कहा, पाकिस्तान में गेंदबाजों को आदर्श मानने की परंपरा रही है तो भारत में बल्लेबाजों को। हमारे यहां गेंदबाज को मजदूर की तरह समझा जाता है।
यही वजह है कि कपिल देव के बाद कोई दूसरा आदर्श तेज गेंदबाज नहीं बन सका। पिछले कुछ वर्षों में बहुत अच्छे तेज गेंदबाज निकले हैं, लेकिन टी-20 ने हालात और विकट कर दिए। स्टैंड्स में बैठा हर कोई सिक्सर के लिए चिल्लाता है, गेंदबाज केलिए तो आफत ही है।