फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Japanese encephalitis cases reduced to one-fourth in five years

Lucknow News: पांच वर्ष में चौथाई रह गए जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले

Mon, 17 Mar 2025 02:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Mar 2025 02:00 AM IST
विज्ञापन
Japanese encephalitis cases reduced to one-fourth in five years
लखनऊ। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के मामले प्रदेश में तेजी से कम हो रहे हैं। संक्रमण दर पिछले पांच वर्ष में घटकर एक चौथाई रह गई है। केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने पिछले वर्ष आए सैंपल के आधार पर रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2018 में संक्रमण दर 11.25 फीसदी थी, जो 2022 में घटकर 2.91 फीसदी रह गई है।
विज्ञापन

माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब में प्रदेश भर से जेई की आशंका वाले सैंपलों की जांच होती है। जेई, जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस (जेईवी) के कारण होने वाला दिमाग का संक्रमण है। ये वायरस संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है, जो जानवरों से मनुष्यों में वायरस फैलाते हैं।
विज्ञापन


वायरस फैलाने वाले मच्छर क्यूलेक्स ट्राइटेनियोरिन्चस समूह के होते हैं, जो जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस (सेंट लुइस इंसेफेलाइटिस वायरस से संबंधित एक फ्लेविवायरस) से संक्रमित हो जाते हैं। इससे यह समस्या होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


संक्रमित व्यक्ति में सामान्य अस्वस्थता, तेज बुखार, सिर दर्द व उल्टी होने की समस्या होती है। इससे दिमाग में सूजन आती है, जो स्थायी दिव्यांगता का कारण बनती है।

30 से 50 फीसदी में स्थायी अपंगता

रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में आने वाले 30 से 50 फीसदी संक्रमितों में स्थायी अपंगता आ जाती है। संक्रमितों में 52.66 फीसदी की आयु 15 साल से कम थी। 60.45 फीसदी संक्रमित पुरुष थे।




राजधानी और आसपास के जनपदों में ज्यादा प्रकोप

पूरे प्रदेश को जापानी इंसेफेलाइटिस के हिसाब से पांच जोन में बांटा गया है। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित यूपी सेंट्रल क्षेत्र है। राजधानी और आसपास के जनपद इसी क्षेत्र में आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी सेंट्रल से पांच साल में कुल 6664 सैंपल जांचे गए। 6.35 संक्रमण दर के साथ 424 पॉजिटिव मामले मिले हैं। पूर्वी यूपी में 1476 सैंपल में 5.55 संक्रमण दर के साथ 82, पश्चिमी यूपी में 591 सैंपल में 4.08 संक्रमण दर के साथ 17, दक्षिणी यूपी में 63 सैंपल में 4.76 संक्रमण दर के साथ तीन मामले मिले। उत्तरी यूपी वाले चित्रकूट, हमीरपुर व जालौन समेत अन्य पड़ोसी जिलों में 10 सैंपल जांचे गए, लेकिन एक भी केस संक्रमित नहीं मिला।

जानिए, कैसे कम हुए मामले



वर्ष-सैंपल- पॉजिटिव मामले- फीसदी

2018- 1981- 223- 11.25



2019- 2381- 136- 5.7

2020- 1032- 54- 5.22

2021- 1283- 56- 4.36



2022- 1958- 57- 2.9

कुल- 8635- 526- 6.09



जापानी इंसेफेलाइटिस की मुख्य बातें

- वर्ष 1924 के दौरान जापान में करीब छह हजार केस मिले।



- वर्ष 1952 में पहली बार मामला आया। वर्ष 1955 में तमिलनाडु में पहली बार किसी व्यक्ति में इसका संक्रमण पता चला।

- वर्ष 2006 में देश में इसके खिलाफ टीकाकरण की शुरुआत हुई।



- बारिश में मौसम में ज्यादा खतरा।



- देश में हर साल करीब 50 हजार नए मामले मिले।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed