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खुद मुलायम के लिए 'आफत' बन जाएगा जनता परिवार!

Fri, 17 Apr 2015 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 17 Apr 2015 01:16 AM IST
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Janta Pariwar to be big challenge for SP.

जनता परिवार की एकता से यूपी में सपा की चुनौतियां बढ़ेंगी। प्रदेश में इसके घटक दलों में सपा को छोड़ किसी अन्य का जनाधार नहीं है। इसके बावजूद वे संगठन और सत्ता में हिस्सेदारी का दावा करेंगे। जनता दल यू और राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियों की अपेक्षाएं ज्यादा रहेंगी।

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सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की अगुवाई में छह घटक दलों का विलय कर नई पार्टी बनाने का फैसला हो चुका है। पार्टी के नाम, निशान और नीतियों पर फैसला लेने के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
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माना जा रहा है कि नई पार्टी का नाम समाजवादी जनता दल होगा। इसमें समाजवादी शब्द सपा से और जनता दल शब्द को दूसरे घटक दलों से लिया गया है। साइकिल निशान को लेकर भी विरोध की स्थिति नहीं है। ऐसे में जल्द ही नए दल का स्वरूप सामने आ जाएगा।
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प्रदेश में सपा ही सबसे महत्वपूर्ण घटक रहेगी और चुनौतियां भी सबसे ज्यादा उसी के सामने रहेंगी। मुख्य घटक होने के नाते उसे छोटे दलों को संतुष्ट करना होगा। हालांकि ये उसके लिए ‘असेट’ कम ‘लायबिलिटी’ ज्यादा होंगे। हो सकता है कि राष्ट्रीय स्तर पर संतुलन साधे रखने के लिए सपा (तब सजद) को कुछ नेताओं को ‘बोझ’ के रूप में ढोना पड़े।

प्रदेश सरकार में होगी नुमाइंदगी की कोशिश

Janta Pariwar to be big challenge for SP.

यूपी विधानसभा में 231 विधायकों और लोकसभा में पांच सांसदों के साथ जनता परिवार के घटक दलों में सपा सबसे बड़ी पार्टी है।

विलय का फैसला करने वाले छह दलों में विधान परिषद और राज्यसभा में भी सपा के सर्वाधिक सदस्य हैं। प्रदेश में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है।

संभावना है कि नई पार्टी (समाजवादी जनता दल) बहुत जल्द अस्तित्व में आ जाएगी। सजद की प्रदेश इकाई हालांकि सपा की प्रदेश इकाई का नया स्वरूप ही होगी लेकिन छोटे दल जरूर उसकी सिरदर्दी बढ़ाएंगे।

भले ही जनाधार सीमित या शून्य हो लेकिन हर घटक दल चाहेगा कि प्रस्तावित नए दल की प्रदेश इकाई में उसे नुमाइंदगी मिले। सरकार में भी उसकी प्रत्यक्ष न सही अप्रत्यक्ष भागीदारी हो।

उनके नेताओं को सांकेतिक सम्मान के लिए लालबत्तियों से नवाजा जाए। पहले से ही अपने दावेदारों को संतुष्ट करने में नाकाम सपा के लिए यह काफी मुश्किल भरा होगा।

जद यू व राजद में खास सक्रियता नहीं

Janta Pariwar to be big challenge for SP.

जद यू के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश निरंजन उर्फ भइयाजी हैं जबकि लालू प्रसाद के राजद की कमान अशोक कुमार सिंह थामे हुए हैं। गतिविधियों के नाम पर दोनों ही दलों की खास सक्रियता नहीं है फिर भी कभी-कभार उनके कार्यक्रम होते रहते हैं।

दो दिन पहले ही जद यू के राज्यसभा सदस्य अली अनवर की अध्यक्षता में पसमांदा अधिकार सम्मेलन आयोजित किया गया। इन दलों के नेताओं को सत्ता और संगठन में ज्यादा भागीदारी की चिंता रहेगी।

इनेलो, जद एस व सजपा का वजूद नहीं
प्रदेश में चौटाला के इंडियन नेशनल लोकदल, देवगौड़ा के जनता दल (सेकुलर) और कमल मोरारका की समाजवादी जनता पार्टी का कोई वजूद नहीं है।

सपा नेताओं को लगता है कि राजधानी में इन तीनों दलों के न दफ्तर है और न ही प्रदेश इकाई। यदि है भी तो सिर्फ कागजों पर। फिर भी इनके राष्ट्रीय नेता चाहेंगे कि प्रदेश में उनके कुछ नेताओं को भी तवज्जो मिले।

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