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Lucknow News: जनेश्वर मिश्र पार्क 14 साल बाद बनेगा अधिकृत पार्क
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जनेश्वर मिश्र पार्क।
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लखनऊ। गोमतीनगर विस्तार स्थित एशिया के सबसे बड़े पार्कों में शुमार जनेश्वर मिश्र पार्क को अब आधिकारिक रूप से पार्कों की सरकारी सूची में शामिल करने की कवायद शुरू हो गई है। लगभग 376 एकड़ में फैला यह पार्क वर्तमान में अधिकृत सूची में दर्ज नहीं है, जिसके कारण इसके भू-उपयोग या आकार में बदलाव का खतरा बना रहता है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम और एलडीए ने इसके गजट नोटिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र के नाम पर बने इस पार्क का लोकार्पण 5 अगस्त 2014 को हुआ था, लेकिन तब इसका गजट नोटिफिकेशन नहीं कराया गया। यह कानूनी चूक तब सामने आई, जब पार्क में वैवाहिक आयोजनों की बुकिंग का जिम्मा एक निजी कंपनी को देने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कागजों में यह अभी अधिकृत पार्क ही नहीं है।
नोटिफिकेशन इसलिए जरूरी
नगर निगम के उद्यान अधीक्षक गंगाराम गौतम के अनुसार, पार्क, खुले मैदान और खेल के मैदान संरक्षण अधिनियम 1905 के तहत शहरी क्षेत्रों में नगर निगम को पार्क का नोटिफिकेशन करने का अधिकार है। नोटिफिकेशन होने के बाद पार्क का क्षेत्रफल और दायरा हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाता है। इसके भू-उपयोग में कोई भी विभाग या संस्था बदलाव नहीं कर सकेगी। जमीन के आकार को घटाने या व्यावसायिक उपयोग की आशंकाएं खत्म हो जाएंगी।
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आपत्ति और सुझाव के लिए मिलेंगे 90 दिन
नगर निगम एलडीए से पार्क का पूरा ब्योरा मिलने के बाद समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना जारी करेगा। इसके तहत आम जनता से पार्क के आकार, प्रकार और जमीन को लेकर 90 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव मांगे जाएंगे। आपत्तियों के निस्तारण के बाद फाइनल नोटिफिकेशन जारी होगा। इस प्रक्रिया में लगभग 4 से 5 महीने का समय लग सकता है।
Iएलडीए से पार्क की विस्तृत जानकारी मांगी गई है। जानकारी मिलते ही आपत्ति-सुझाव के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी। प्रक्रिया पूरी होते ही फाइनल गजट नोटिफिकेशन कर दिया जाएगा।I
- गंगाराम गौतम, उद्यान अधीक्षक, नगर निगम
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समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र के नाम पर बने इस पार्क का लोकार्पण 5 अगस्त 2014 को हुआ था, लेकिन तब इसका गजट नोटिफिकेशन नहीं कराया गया। यह कानूनी चूक तब सामने आई, जब पार्क में वैवाहिक आयोजनों की बुकिंग का जिम्मा एक निजी कंपनी को देने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कागजों में यह अभी अधिकृत पार्क ही नहीं है।
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नोटिफिकेशन इसलिए जरूरी
नगर निगम के उद्यान अधीक्षक गंगाराम गौतम के अनुसार, पार्क, खुले मैदान और खेल के मैदान संरक्षण अधिनियम 1905 के तहत शहरी क्षेत्रों में नगर निगम को पार्क का नोटिफिकेशन करने का अधिकार है। नोटिफिकेशन होने के बाद पार्क का क्षेत्रफल और दायरा हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाता है। इसके भू-उपयोग में कोई भी विभाग या संस्था बदलाव नहीं कर सकेगी। जमीन के आकार को घटाने या व्यावसायिक उपयोग की आशंकाएं खत्म हो जाएंगी।
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आपत्ति और सुझाव के लिए मिलेंगे 90 दिन
नगर निगम एलडीए से पार्क का पूरा ब्योरा मिलने के बाद समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना जारी करेगा। इसके तहत आम जनता से पार्क के आकार, प्रकार और जमीन को लेकर 90 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव मांगे जाएंगे। आपत्तियों के निस्तारण के बाद फाइनल नोटिफिकेशन जारी होगा। इस प्रक्रिया में लगभग 4 से 5 महीने का समय लग सकता है।
Iएलडीए से पार्क की विस्तृत जानकारी मांगी गई है। जानकारी मिलते ही आपत्ति-सुझाव के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी। प्रक्रिया पूरी होते ही फाइनल गजट नोटिफिकेशन कर दिया जाएगा।I
- गंगाराम गौतम, उद्यान अधीक्षक, नगर निगम