लखनऊ को दहलाने की साजिश रचने वाले जैश के तीन आतंकियों को उम्रकैद
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नेताओं को बंधक बनाकर अपने आतंकी साथियों को छुड़ाने की साजिश रचने वाले तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को लखनऊ की विशेष न्यायालय ने उम्र कैद की सजा सुनाई है।
जैश-ए-मोहम्मद के तीनों आतंकियों को भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने समेत 15 अपराधों में दोषी करार दिया गया था। इनमें से उन्हें 8 मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। तीनों ही आतंकियों पर 1.30-1.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। तीनों को 30 जून को दोषी ठहराया गया था।
लखनऊ जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच हुई विशेष न्यायाधीश ओम प्रकाश मिश्रा ने सजा सुनाते हुए कहा कि तीनों पहले से किसी अपराध में दोषी नहीं पाए गए हैं। मुठभेड़ के दौरान भी किसी पुलिसकर्मी को कोई चोट नहीं आई है। ऐसे में उनके अपराध को ‘विरल से विरलतम’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
2007 में लखनऊ से दबोचा था
एसटीएफ ने 2007 में लखनऊ के टेढ़ी पुलिया इलाके में मुठभेड़ के बाद तीनों आतंकियों सैफुर्रहमान, मोहम्मद आबिद और मिर्जा राशिद बेग को जिंदा गिरफ्तार किया था।
कौन हैं तीनों आतंकी
सैफुर्रहमान उर्फ यूसुफ उर्फ फैसल
- उम्र : 30 वर्ष, पिता : खलील अहमद
निवासी : मुल्तान- पंजाब, पाकिस्तान।
आबिद उर्फ फत्ते उर्फ सफदर उर्फ अयूब
- उम्र : 35 वर्ष, पिता : मोहम्मद रफीक
निवासी : लाहौर, पाकिस्तान।
मिर्जा राशिद बेग उर्फ राजा काजमी
उम्र : 35 वर्ष, पिता : मिर्जा आरिफ बेग
निवासी : गुजरावाला, पाकिस्तान।
जानिए पंद्रह सजाएं : क्यों और कितनी दी गई
सजा 1 : आईपीसी 307 : आतंकियों ने मुठभेड़ के दौरान पुलिस पर गोलियां चलाई थीं। उन पर हत्या के प्रयास का मामला साबित हुआ। अदालत ने कहा, आतंकियों को इसके लिए 10 साल कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी जाती है।
सजा 2 : आईपीसी 115 : आतंकियों ने ऐसा अपराध करने का प्रयास किया, जिसमें किसी की जान जा सकती थी। इसके लिए उन्हें सात साल के कठोर कारावास और 10 हजार का जुर्माना लगाया गया।
सजा 3 : आईपीसी 120-बी : भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आपराधिक षड्यंत्र किया। अदालत ने कहा कि उन्हें इसके लिए उन्हें फांसी भी दी जा सकती थी। उन्हें आजीवन कारावास से दंडित किया गया है।
सजा 4 : आईपीसी 121 : आतंकियों ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का प्रयास किया। इसके लिए उन्हें आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है।
सजा 5 : आईपीसी 121-ए : उन्होंने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश और षड्यंत्र रचा। अदालत ने कहा, इसके लिए अधिकतम उम्रकैद का प्रावधान है। उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई।
सजा 6 : आईपीसी 122 : भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी की, अस्थिरता पैदा करने के लिए हथियार और गोला-बारूद जमा किया। इसमें अधिकतम उम्रकैद का प्रावधान है। अदालत ने आतंकियों को 10-10 साल कठोर कारावास और 10-10 हजार जुर्माना लगाया।
ये अपराध और ये सजाएं
सजा 7 : आईपीसी 124-ए : भारत के खिलाफ विरोध को भड़काने का प्रयास किया। इसके लिए तीनों को आजीवन कारावास दिया गया।
सजा 8 : आईपीसी 414 : उनके पास जो हथियार मिले, वे उनके नहीं थे। उन्होंने इन्हें अपने पास और अपनी जानकारी में छिपाया। इसके लिए उन्हें तीन वर्ष कठोर कारावास की सजा दी गई।
सजा 9 : विदेशी अधिनियम 14-ए (बी) : आठ वर्ष कठोर कारावास और 20-20 हजार जुर्माना
सजा 10 : विधि विरुद्ध क्रिया कलाप (निवारण अधिनियम) 1967 धारा 16-बी : आजीवन कारावास।
सजा 11 : विधि विरुद्ध क्रिया कलाप (निवारण अधिनियम) 1967 धारा 18 : आतंकी काम करने और उसकी तैयारी का षड्यंत्र रचने के लिए उम्रकैद और 10-10 हजार की सजा।
सजा 12 : विधि विरुद्ध क्रिया कलाप (निवारण अधिनियम) 1967 धारा 20 : आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य साबित हुए। आजीवन कारावास।
सजा 13 : विधि विरुद्ध क्रिया कलाप (निवारण अधिनियम) 1967 धारा 23 - 1 : आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की सहायता के लिए आरडीएक्स जैसे बेहद खतरनाक विस्फोटक जमा किए। इसके लिए आतंकियों को उम्रकैद की सजा दी गई।
सजा 14 : विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 धारा 5 : विस्फोटक बरामद हुए, जिसके लिए उन्हें आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई।
सजा 15 : आयुध अधिनियम 1959 धारा 7 : 10-10 वर्ष कैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माना।