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हाईकोर्ट ने एक साथ 23 वकीलों को भेजा जेल
शत्रुघ्न शुक्ला/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 31 May 2014 02:48 AM IST
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अवमानना के एक मामले में लखीमपुर खीरी के 24 वकीलों को दोषी करार दिया है।
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इनमें से एक अधिवक्ता को कोर्ट ने तीन माह की कैद तथा 23 अन्य को एक-एक माह के कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई है।
हालांकि जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा व जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने फैसले में यह भी कहा है कि इन वकीलों की सजा, फैसले की तारीख से तीन माह तक निलंबित रहेगी।
अदालत ने मामले को समुचित आदेशों के लिए सितंबर के तीसरे हफ्ते में सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला वर्ष 2012 का है। इस मामले का संदर्भ लखीमपुर खीरी के जनपद न्यायाधीश ने उच्च न्यायालय भेजा था।
कोर्ट ने इस मामले में अधिवक्ता हरजीत सिंह को 3 माह की कैद व 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
इसी मामले के 23 अन्य वकीलों कोएक-एक माह के साधारण कारावास के साथ प्रत्येक को एक-एक हजार जुर्माने से दंडित किया है।
दोषी अधिवक्ताओं में अजय मिश्र, रामकुमार भार्गव, लालजी वर्मा (लाल जी प्रसाद), राजीव पांडेय, रामगोपाल पांडेय, प्रदीप सिन्हा (प्रदीप कुमार सिन्हा), राकेश शुक्ला (राकेश कुमार शुक्ला), बलवीर वर्मा, राजीव कुमार तिवारी उर्फ अन्नू, अजय पांडेय, पंकज वाजपेयी, घनश्याम अग्निहोत्री, चंद्रमोहन सिंह, जंग बहादुर सिंह, आफताब अहमद, हरीश श्रीवास्तव (हरीश कुमार श्रीवास्तव), मनोज प्रजापति (मनोज कुमार), अखिलेश त्रिपाठी, मुनेन्द्र त्रिपाठी, राजीव (राजीव कुमार), रामचंद्र दीक्षित, मुनेन्द्र त्रिपाठी व संजीव श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।
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यह था मामला
हाईकोर्ट को भेजे संदर्भ के मुताबिक वकीलों व लेखपालों के बीच हुए विवाद के मामले में 20 अक्तूबर 2011 को पीठासीन अधिकारी ने एक रिलीज आदेश पारित किया था।
इसके खिलाफ हरजीत सिंह की अगुवाई में वकीलों ने पीठासीन अधिकारी का चैम्बर घेर लिया और नारेबाजी, पथराव और जान से मारने की धमकी भी दी।
अदालत ने इन वकीलों को न्यायालय की अवमानना कानून के तहत सजा सुनाई है।