यूपी भाजपा व सरकार में फेरबदल का खाका खींच जाएंगे जे पी नड्डा, कल आएंगे लखनऊ
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भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का 5 जुलाई को होने वाला लखनऊ दौरा संगठनात्मक फेरबदल का खाका भी खींचेगा। इसकी सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है। इसके तहत क्षेत्रीय संगठन मंत्रियों के क्षेत्रों में बदलाव सहित प्रदेश पदाधिकारियों की भूमिका में फेरबदल शामिल है। उनके इसी दौरे में कुछ चेहरों को संगठन से सरकार और सरकार से संगठन में लाने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श होने के संकेत हैं।
दरअसल, चुनावों के बाद भाजपा संगठनात्मक ढांचा दुरुस्त करती रही है। साथ ही क्षेत्रीय संगठन मंत्रियों की भूमिका में बदलाव किए जाते रहे हैं। वैसे भी इस समय प्रदेश में भाजपा के छह क्षेत्रों की जिम्मेदारी सिर्फ चार क्षेत्रीय संगठन मंत्रियों के कंधों पर है। इनमें रत्नाकर के पास गोरखपुर व काशी तथा भवानी सिंह के पास ब्रज व कानपुर क्षेत्र हैं जबकि प्रद्युम्न कुमार के पास अवध और अजय कुमार के पास पश्चिम क्षेत्र है।
सूत्रों के अनुसार, सदस्यता अभियान और संगठनात्मक चुनाव के चलते भाजपा नेतृत्व की कोशिश है कि सभी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग संगठन मंत्री तय कर दिए जाएं। इससे संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन ठीक तरह से हो सकेगा।
यह है एक वजह
भाजपा में बतौर पूर्णकालिक पदाधिकारी काम करने के लिए अमूमन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों को ही भेजा जाता है। वैसे तो जरूरत के लिहाज से अब कभी भी संघ के प्रचारक को सहयोगी संगठनों में बतौर संगठन मंत्री भेजा जाने लगा है। पर, सामान्यत: मार्च में होने वाली प्रतिनिधि सभा और जुलाई में होने वाली बैठक में ही प्रचारकों की नई भूमिका का फैसला किया जाता है।
सूत्र बताते हैं कि संघ से कुछ नए चेहरे भाजपा में भेजे जाएंगे जबकि इस समय क्षेत्र संगठन मंत्रियों में एक को संघ में वापस बुलाया जा सकता है या उन्हें अन्य किसी सहयोगी संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसी के साथ मौजूदा संगठन मंत्रियों के क्षेत्रों में भी बदलाव प्रस्तावित है।
इन मुद्दों पर भी विचार संभव
भाजपा संगठन के पास मौजूद फीडबैक कई मंत्रियों की भूमिका व रीति-नीति को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है। इसे देखते हुए पार्टी ने मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव का मन बना लिया है। साथ ही कुछ लोगों को संगठन में भेजने का फैसला ले लिया है।
वहीं, संगठन के कुछ चेहरे सरकार में भेजे जाएंगे। जाहिर है कि इनकी जगह नए लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और मौजूदा पदाधिकारियों में कुछ को तरक्की देकर महत्वपूर्ण भूमिका में लाया जा सकता है।
वैसे तो सदस्यता अभियान और संगठनात्मक चुनाव वर्ष होने के नाते संगठन का नया ढांचा बनना ही है। पर, मंत्रिमंडल में फेरबदल की स्थिति में संगठन के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका में बदलाव होना तय है। इस नाते नड्डा का यह दौरा उनके फीडबैक प्राप्त करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।