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डॉ. सूर्यकांत सहित अन्य विशेषज्ञों का आइवरमेक्टिन श्वेतपत्र डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर
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डॉ. सूर्यकांत सहित अन्य विशेषज्ञों का आइवरमेक्टिन श्वेतपत्र डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर
केजीएमयू के रेस्पिरेट्री मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत एवं अन्य विशेषज्ञों के आइवरमेक्टिन श्वेतपत्र को डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर जगह मिली हुई है। यह दवा 40 वर्षों से भी अधिक समय से भारत समेत पूरी दुनिया में फाइलेरिया तथा अन्य बीमारियों के उपचार में प्रयोग में लाई जा रही है। इस दवा की खोज करने वाले जापान के डॉ. सतोषी ओमूरा तथा अमेरिका के डॉ. विलियम सी कैम्पबेल को 2015 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि आइवरमेक्टिन कई वायरस जनित बीमारियों में भी कारगर होती है। कोविड-19 वायरस की रोकथाम में भी यह काफी हद तक कारगर साबित हो रही है। इस दवा के इन प्रभावों को ध्यान मे रखते हुए डॉ. सूर्यकांत, डॉ. वीके अरोरा (दिल्ली), डॉ. दिगम्बर बेहरा (चंडीगढ़), डॉ. अगम बोरा (मुम्बई), डॉ. टी मोहन कुमार (कोयम्बटूर), डॉ. नारायणा प्रदीप (केरल) आदि ने आईवरमेक्टिन पर एक श्वेतपत्र प्रकाशित किया। 100 से अधिक देशों के चिकित्सक एवं वैज्ञानिकों ने इसका अध्ययन किया है व इसमें वर्णित जानकारी से लाभान्वित हुए हैं।
प्रदेश में हो रहा दवा का प्रयोग
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा 6 अगस्त 2020 को आईवरमेक्टिन को कोविड-19 से बचाव एवं उपचार में इस्तेमाल को लेकर शासनादेश पारित किया जा चुका है। यह बहुत सुरक्षित दवा है।
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केजीएमयू के रेस्पिरेट्री मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत एवं अन्य विशेषज्ञों के आइवरमेक्टिन श्वेतपत्र को डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर जगह मिली हुई है। यह दवा 40 वर्षों से भी अधिक समय से भारत समेत पूरी दुनिया में फाइलेरिया तथा अन्य बीमारियों के उपचार में प्रयोग में लाई जा रही है। इस दवा की खोज करने वाले जापान के डॉ. सतोषी ओमूरा तथा अमेरिका के डॉ. विलियम सी कैम्पबेल को 2015 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि आइवरमेक्टिन कई वायरस जनित बीमारियों में भी कारगर होती है। कोविड-19 वायरस की रोकथाम में भी यह काफी हद तक कारगर साबित हो रही है। इस दवा के इन प्रभावों को ध्यान मे रखते हुए डॉ. सूर्यकांत, डॉ. वीके अरोरा (दिल्ली), डॉ. दिगम्बर बेहरा (चंडीगढ़), डॉ. अगम बोरा (मुम्बई), डॉ. टी मोहन कुमार (कोयम्बटूर), डॉ. नारायणा प्रदीप (केरल) आदि ने आईवरमेक्टिन पर एक श्वेतपत्र प्रकाशित किया। 100 से अधिक देशों के चिकित्सक एवं वैज्ञानिकों ने इसका अध्ययन किया है व इसमें वर्णित जानकारी से लाभान्वित हुए हैं।
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प्रदेश में हो रहा दवा का प्रयोग
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा 6 अगस्त 2020 को आईवरमेक्टिन को कोविड-19 से बचाव एवं उपचार में इस्तेमाल को लेकर शासनादेश पारित किया जा चुका है। यह बहुत सुरक्षित दवा है।
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