काशी की रस्साकसी में डॉन मुख्तार ने छोड़ा मैदान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशी से मोदी के लिए राह आसान होने का संकेत है या फिर कांग्रेस का जुगाड़, मुख्तार अंसारी ने काशी का मैदान फिलहाल छोड़ दिया है।
गुरुवार को मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने एलान कर दिया कि मुख्तार कौमी एकता दल के प्रत्याशी के रूप में सिर्फ घोसी लोकसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे।
हालांकि, इसकी अटकलें काफी दिनों से चल रही थीं कि मुख्तार कांग्रेस की मदद करने के लिए मैदान छोड़ सकते हैं। गुरुवार शाम अफजाल के बयान के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया।
हालांकि, अफजाल ने बताया कि मुख्तार अपनी आगे की योजना का एलान 15 अप्रैल को करेंगे।
मुख्तार नहीं, साझा उम्मीदवार होगा मैदान में
दरअसल
मोदी को तगड़ी चुनौती देने के मकसद से कौमी एकता दल ने पिछले दिनों सभी
गैरभाजपाई दलों के सामने प्रस्ताव रखा था कि सभी दल मुख्तार अंसारी को
समर्थन दें या किसी साझा प्रत्याशी के लिए उनका समर्थन लें।
दल के अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने बताया कि ‘सेक्युलर दलों ने उनके प्रस्ताव पर गंभीरता दिखाई और काफी सकारात्मक रिस्पांस मिला। उम्मीद है दो-तीन दिन में कोई ऐसी तस्वीर सामने आएगी, जिसमें मोदी को कड़ी चुनौती मिलती दिखेगी।’
मीटिंग में सामने आईं थीं दो बातें
गौरतलब है कि 27 मार्च को अफजाल अंसारी के गाजीपुर स्थित आवास पर मुख्तार को चुनाव लड़ाने के मसले पर दल के नेताओं को एक बैठक हुई थी, जिसमें दो तरह की राय सामने आई।
एक पक्ष का कहना था कि मुख्तार को हर हाल में वाराणसी से भी लड़ना चाहिए तो कुछ लोग इस बात के पक्षधर थे कि बनारस से नहीं लड़ना चाहिए।
ऐसे लोगों का तर्क था कि एक तो सेक्युलर मतदाताओं के बंटने के आधार पर मोदी को मदद करने की तोहमत लगेगी, दूसरा ध्रुवीकरण की भी स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जो हर नजर में मोदी को लाभ पहुंचाने वाली होंगी।
मुख्तार की छवि भी थी एक वजह
अफजाल ने बताया कि महसूस किया गया कि मुख्तार को लड़ाने को लेकर जब दल में दो तरह की राय है तो सेक्युलर मतदाताओं और खासकर मुसलमानों में भी भ्रम की स्थिति में होगी।
ऐसे में मुख्तार को लड़ाने के फैसले पर पुनर्विचार को मजबूर होना पड़ा होगा। मुख्तार की गिनती अतीक अहमद जैसे माफियाओं में होती है।
आखिर में यह तय हुआ कि मुख्तार के लिए सभी दलों से इस आधार पर समर्थन मांगा जाए कि पिछले लोकसभा चुनाव में मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ उन्होंने औरों से अधिक वोट हासिल किए थे।
पर हमें एहसास था कि कुछ दल मुख्तार की छवि को लेकर नाक-भौं सिकोड़ सकते हैं। लिहाजा यह वैकल्पिक प्रस्ताव गया कि सभी दल सहमति कर साझा प्रत्याशी खड़ा करें। उस स्थिति में हम उनको समर्थन देंगे।