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Lucknow News: हजारों करोड़ के टर्नओवर वाली आईटीआई 20 करोड़ के व्यापार में सिमटी
Fri, 13 Dec 2024 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 13 Dec 2024 12:37 AM IST
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रायबरेली। शहर और जिले की लाइफ लाइन मानी जाने वाली आईटीआई फैक्टरी अब अपने अस्तित्व के संकट से ही जूझ रही है। नेता प्रतिपक्ष एवं जिले के सांसद राहुल गांधी की ओर से लोकसभा में पूछे गए सवाल से इसका खुलासा हुआ है। हर साल हजारों करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज की रायबरेली इकाई इस वित्त वर्ष में केवल 20 करोड़ रुपये का ही व्यापार कर पाई है।
51 साल पहले सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित हुई इस फैक्टरी में अब तीन प्रतिशत ही स्थाई कर्मचारी बचे हैं। फैक्टरी को केंद्र सरकार से न पर्याप्त आर्डर मिल रहे हैं और न रिवाइवल पैकेज ही मिल रहा है। आईटीआई की रायबरेली इकाई को वित्तीय सहायता के 300 करोड़ रुपए मिलने का आज भी इंतजार है।
एक समय इस फैक्टरी में 7000 स्थाई कर्मचारी हुआ करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सांसद राहुल गांधी के पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया है कि आईटीआई की रायबरेली इकाई में वर्तमान में 322 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इसमें 173 स्थाई, 68 संविदा कर्मी और 83 अनौपचारिक कर्मचारी काम कर रहे हैं।
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राहुल ने सरकार से लोकसभा में पूछा कि कर्मचारियों को समय से वेतन प्रदान करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं। इस सवाल के जवाब में सरकार ने बताया है कि कर्मचारियों को समय से वेतन दिलाने के लिए जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। अब तक 4456 करोड़ रुपये की विधि सहायता को मंजूरी दी गई है। इसमें 4157 करोड़ रुपये अवमुक्त किये जा चुके हैं। इस धनराशि का भी आधे से अधिक हिस्सा बकाये और वेतन में खर्च हो गया। सरकार के जवाब से ही सामने आया है कि वित्तीय सहायता के करीब 300 करोड़ रुपए अभी भी बाकी हैं। केंद्र सरकार वित्तीय सहायता की इस धनराशि को रिलीज करने में रुचि नहीं ले रही है।
इनसेट
1973 में स्थापित हुई थी आईटीआई की रायबरेली यूनिट
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने छह अक्तूबर 1973 को सार्वजनिक क्षेत्र की आईटीआई की रायबरेली इकाई स्थापित कराई थी। प्रारंभ में यहां बेसिक फोन के एक्सचेंज के लिए क्रॉस बार यूनिट का उत्पादन होता था। समय बदलने के साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सी डॉट का उत्पादन शुरू हुआ। इस समय सी और रेलवे के लिए आईटीआई में ओएफसी केबल का उत्पादन हो रहा है। इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज की पालघाट, मनकापुर, गोंडा, रायबरेली, बेंगलुरु, नैनी, प्रयागराज और जम्मू में इकाइयां स्थापित हैं।
इनसेट
सोनिया ने दिलाया था 8000 करोड़ का रिवाइवल पैकेज
यूपीए शासनकाल में सांसद के रूप में सोनिया गांधी ने 2009-10 में करीब 8000 करोड़ का रिवाइवल पैकेज आईटीआई की रायबरेली इकाई के लिए उपलब्ध कराया था। इस धनराशि का अधिकतर हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और बकाया में ही खर्च हो गया था। इसी वजह से फैक्टरी बाजार के मांग के हिसाब से अपडेट नहीं हो पाई।
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51 साल पहले सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित हुई इस फैक्टरी में अब तीन प्रतिशत ही स्थाई कर्मचारी बचे हैं। फैक्टरी को केंद्र सरकार से न पर्याप्त आर्डर मिल रहे हैं और न रिवाइवल पैकेज ही मिल रहा है। आईटीआई की रायबरेली इकाई को वित्तीय सहायता के 300 करोड़ रुपए मिलने का आज भी इंतजार है।
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एक समय इस फैक्टरी में 7000 स्थाई कर्मचारी हुआ करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सांसद राहुल गांधी के पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया है कि आईटीआई की रायबरेली इकाई में वर्तमान में 322 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इसमें 173 स्थाई, 68 संविदा कर्मी और 83 अनौपचारिक कर्मचारी काम कर रहे हैं।
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राहुल ने सरकार से लोकसभा में पूछा कि कर्मचारियों को समय से वेतन प्रदान करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं। इस सवाल के जवाब में सरकार ने बताया है कि कर्मचारियों को समय से वेतन दिलाने के लिए जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। अब तक 4456 करोड़ रुपये की विधि सहायता को मंजूरी दी गई है। इसमें 4157 करोड़ रुपये अवमुक्त किये जा चुके हैं। इस धनराशि का भी आधे से अधिक हिस्सा बकाये और वेतन में खर्च हो गया। सरकार के जवाब से ही सामने आया है कि वित्तीय सहायता के करीब 300 करोड़ रुपए अभी भी बाकी हैं। केंद्र सरकार वित्तीय सहायता की इस धनराशि को रिलीज करने में रुचि नहीं ले रही है।
इनसेट
1973 में स्थापित हुई थी आईटीआई की रायबरेली यूनिट
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने छह अक्तूबर 1973 को सार्वजनिक क्षेत्र की आईटीआई की रायबरेली इकाई स्थापित कराई थी। प्रारंभ में यहां बेसिक फोन के एक्सचेंज के लिए क्रॉस बार यूनिट का उत्पादन होता था। समय बदलने के साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सी डॉट का उत्पादन शुरू हुआ। इस समय सी और रेलवे के लिए आईटीआई में ओएफसी केबल का उत्पादन हो रहा है। इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज की पालघाट, मनकापुर, गोंडा, रायबरेली, बेंगलुरु, नैनी, प्रयागराज और जम्मू में इकाइयां स्थापित हैं।
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सोनिया ने दिलाया था 8000 करोड़ का रिवाइवल पैकेज
यूपीए शासनकाल में सांसद के रूप में सोनिया गांधी ने 2009-10 में करीब 8000 करोड़ का रिवाइवल पैकेज आईटीआई की रायबरेली इकाई के लिए उपलब्ध कराया था। इस धनराशि का अधिकतर हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और बकाया में ही खर्च हो गया था। इसी वजह से फैक्टरी बाजार के मांग के हिसाब से अपडेट नहीं हो पाई।