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UP News: अस्तित्व के संकट से जूझ रही रायबरेली की लाइफलाइन आईटीआई, बदहाली पर राहुल गांधी ने सदन में उठाए सवाल

Thu, 12 Dec 2024 04:25 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 12 Dec 2024 04:25 PM IST
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ITI facing an existential crisis In Raebareli which is considered life line of district
सांसद राहुल गांधी - फोटो : X / @INCIndia

यूपी के रायबरेली में जिले की लाइफ लाइन मानी जाने वाली आईटीआई अब अपने अस्तित्व के संकट से ही जूझ रही है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा में सवाल किया तो आईटीआई का सच सामने आ गया। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री ने सांसद के सवालों का जवाब दिया। 

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सदन के भीतर से यह बात उभर कर सामने आई है कि हर साल हजारों करोड़ रुपए के टर्नओवर  वाली इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज की रायबरेली इकाई इस वित्त वर्ष में केवल 20 करोड़ रुपए का ही व्यापार कर पाई है। 51 साल पहले सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित हुई इस फैक्टरी में अब तीन प्रतिशत ही स्थाई कर्मचारी बचे हैं। फैक्टरी को केंद्र सरकार से न पर्याप्त आर्डर मिल रहे हैं और न रिवाइवल पैकेज ही मिल रहा है। आईटीआई की रायबरेली इकाई को वित्तीय सहायता के 300 करोड़ रुपए मिलने का आज भी इंतजार है। 
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बताते हैं कि कभी इस फैक्टरी में 7000 स्थाई कर्मचारी हुआ करते थे। सांसद राहुल गांधी के पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने बताया कि आईटीआई की रायबरेली इकाई में वर्तमान में 322 कर्मचारी ही कार्यरत है। इसमें 173 स्थाई, 68 संविदा कर्मी और 83 अनौपचारिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। 

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वेतन प्रदान करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार से लोकसभा में आईटीआई के कर्मचारियों को समय से वेतन प्रदान करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं? इस पर भी सवाल किया। जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया है कि कर्मचारियों को समय से वेतन दिलाने के लिए जरूरी उपाय किए जा रहे हैं। 


अब तक 4456 करोड़ रुपए की विधि सहायता को मंजूरी दी गई है। विभिन्न बातों में 4157 करोड़ रुपए अवमुक्त किए जा चुके हैं। इस धनराशि का भी आधे से अधिक हिस्सा बकाए और वेतन में खर्च हो गया। वहीं वित्तीय सहायता के करीब 300 करोड़ रुपए अभी भी बाकी हैं। एक सवाल के जवाब में यह भी साफ हो गया कि वित्तीय सहायता की धनराशि को रिलीज नहीं किया जा सकता है। 

1973 में स्थापित हुई थी आईटीआई की रायबरेली यूनिट

छह अक्तूबर 1973 को  पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सार्वजनिक क्षेत्र की आईटीआई की रायबरेली इकाई स्थापित कराई थी। प्रारंभ में यहां बेसिक फोन के एक्सचेंज के लिए क्रॉस बार यूनिट का उत्पादन होता था समय बदलने के साथ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सी डॉट का उत्पादन शुरू हुआ इस समय सी और रेलवे के लिए आईटीआई में ओएफसी केबल का उत्पादन हो रहा है। इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज की पालघाट, मनकापुर (गोंडा), रायबरेली, बेंगलुरु, नैनी (प्रयागराज) और जम्मू में स्थापित हैं। 

सोनिया गांधी ने दिलाया था 8000 करोड़ का रिवाइवल पैकेज

यूपीए शासनकाल में संसद के रूप में सोनिया गांधी ने 2009-10 में करीब 8000 करोड़ का रिवाइवल पैकेज आईटीआई की रायबरेली इकाई के लिए उपलब्ध कराया था। इस धनराशि का अधिकतर हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और बकाया में ही खर्च हो गया था। इसी कारण फैक्टरी नए बाजार के मुताबिक खुद को ढाल नहीं सकी है।

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