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Lucknow News: आसान नहीं इन्क्यूबेशन सेंटर को आवंटित रकम पाना

Tue, 21 Jan 2025 01:41 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jan 2025 01:41 AM IST
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It is not easy to get the amount allocated to the incubation center.
लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2020 भले ही छात्रों के स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की बात करती है, लेकिन धरातल पर इसका प्रभाव शून्य है। नीति के तहत राज्य विवि में स्थापित इन्क्यूबेशन सेंटर के आवंटित प्रोत्साहन बजट को हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। आलम ये है कि यहां दो विश्वविद्यालयों में स्थापित इन्क्यूबेशन सेंटर में से किसी को भी पूरी वित्तीय धनराशि का भुगतान नहीं हो सका है। ऐसे में इनसे जुड़ने वाले छात्रों के स्टार्टअप प्रोत्साहन के इंतजार में शुरू होने के पहले ही बंद हो जा रहे हैं।
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यूपी स्टार्टअप नीति 2020 के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय और ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में 2022 में इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना की गई थी। इन दोनों विवि के सेंटर ने सेक्शन 8 में अपनी कंपनी भी बना ली थी। राज्य सरकार से मान्यता भी मिल गई थी, जिसके बाद यूपी इलेक्ट्राॅनिक्स काॅरपोरेशन लिमिटेड ने स्टार्टअप को प्रोत्साहन के लिए पांच वर्षों के लिए 1.5 करोड़ रुपये (सालाना 30 लाख रुपये) आवंटित किए थे, मगर दोनों इन्क्यूबेशन सेंटर को तीन वर्षों में एक बार भी पूरी वार्षिक प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हो सका है। जो विभागीय शिथिलिता, लचर कार्यशैली और कठिन नीतियों को बयां करता है।
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यूपी इलेक्ट्राॅनिक्स काॅरपोरेशन लिमिटेड से सहायता न मिलने के अनुभवों से सीखते हुए अन्य विश्वविद्यालयों ने अपने यहां इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना धीमी कर दी है, जबकि जिनके यहां यह हैं, वहां विद्यार्थियों के विचार और ज्ञान होने के बाद भी उन्हें इसका फायदा नहीं मिल पाता है। इससे शहर के इन विवि में अब तक एक भी स्टार्टअप सफल नहीं हो पाया है।
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अनुदान पाने में यहां आती है चुनौती
स्टार्टअप नीति में प्रोत्साहन को पाने के लिए प्रक्रिया इतनी कठिन है कि नया इसे पूरा करने में ही हिम्मत हार जाता है। इसमें अनुदान हासिल करने के लिए इन्क्यूबेटर को केंद्र सरकार के संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग से प्रमाणित होना पड़ता है, जबकि यह कार्य विवि स्तर पर भी हो सकता है। इसके अलावा इन्क्यूबेटर को पहले अपनी जेब से राशि खर्च करनी होती है, बाद में उसका भुगतान किया जाता है। इसके साथ ही इंक्यूबेटर को प्रत्येक वर्ष महालेखा परीक्षा अथवा सूचीबद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट से अपना ऑडिट करवाना होता है। इसके अलावा और भी कई ऐसे नियम हैं, जिसका व्यावहारिक प्रयोग बहुत कठिन है।
शासन को नीतियों करना होगा परिर्वतन
विवि के इन्क्यूबेशन सेंटर का कार्य देखने वाले शिक्षकों का कहना है कि अनुदान हासिल करने के लिए शासन की नीतियां बहुत कठिन हैं। इसे आसान बनाने की जरूरत है। एक ओर राशि इन्क्यूबेशन सेंटर को दी जाती है, जबकि उसका भुगतान यूपी इलेक्ट्राॅनिक्स काॅरपोरेशन लिमिटेड को करना होता है। इसलिए भी यह कठिन होता है।

जानकारी के अनुसार दोनों विश्वविद्यालयों को प्रोत्साहन दिया गया है। अगर रकम आवंटन में कमी की बात समाने आ रही है तो हमें इसकी जांच कराकर आवश्यक निर्देश देंगे। यूपी में सबसे अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं। हम इन्हें आगे बढ़ाने के लिए बेहतर माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- अनुराग यादव, प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स
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