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नमामि गंगे परियोजना : नाबालिग बेटे संग आईटी कंसलटेंट ने हैक किया था प्रमुख सचिव का डाटा

Tue, 20 Dec 2022 02:22 PM IST
लखनऊ ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Tue, 20 Dec 2022 02:22 PM IST
सार

एक शातिर आईटी कंसल्टेंट ने नाबालिग बेटे के साथ मिलकर नमामि गंगे परियोजना के प्रमुख सचिव का डाटा हैक कर लिया था और मेल भेजकर बिटक्वाइन की मांग की थी।

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IT consultant hacked the data of principal secretary of Namami Gange.
आरोपी सत्य प्रकाश। - फोटो : amar ujala

विस्तार

नमामि गंगे परियोजना के प्रमुख सचिव का प्राइवेट डेटा उनके ही निजी आईटी कंसलटेंट सत्य प्रकाश ने हैक किया था। इसमें उसने कंप्यूटर प्रोग्रामर नाबालिग बेटे की मदद ली थी। सत्य प्रकाश ने अपनी ही कंपनी के तीन कर्मचारियों को फंसाने के लिए उनके खिलाफ जाली सुबूत बनाए। इस पर इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। जांच बढ़ी तो आईटी कंसलटेंट की पोल खुल गई। उसके कंप्यूटर से अहम सुराग मिले। इसके आधार पर सोमवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके बेटे को किशोर न्यायालय में पेश कर बाल सुधार गृह भेज दिया गया। साक्ष्य फॉरेंसिक जांच को भेजे गए हैं।

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प्रभारी निरीक्षक साइबर क्राइम थाना मो. मुस्लिम खान के मुताबिक मूलरूप से पटना निवासी सत्य प्रकाश यहां शहीद पथ पर पार्थ अपार्टमेंट में परिवार सहित रहता है। नमामि गंगे परियोजना के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव से नजदीकियां बढ़ाकर उसने उनका भरोसा जीत लिया। सत्य प्रकाश उनके निजी व कार्यालय में इंटरनेट से जुड़ी समस्या दूर करने लगा। प्रमुख सचिव की गोपनीय जानकारियां हासिल कर उनका मेल व डेटा हैक कर लिया। फिर उन्हें मेल कर पांच बिटक्वाइन (80 लाख रुपये) मांगे। हालांकि, प्रमुख सचिव ने रकम नहीं दी और साइबर क्राइम में केस दर्ज करा दिया।
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साथियों को फंसाने के लिए बनाए जाली सुबूत
सत्य प्रकाश ने अपनी कंसल्टेंट कंपनी के कर्मचारियों उतरेटिया बाजार के अमित प्रताप सिंह, वृंदावन योजना सेक्टर-9 के रजनीश निगम और गोमतीनगर के हार्दिक खन्ना को फंसाने के लिए इनके खिलाफ जाली सुबूत तैयार किए। इसमें नाबालिग बेटे का सहयोग लिया। खुद को फंसता देख सत्य प्रकाश ने बनाए सुबूत प्रमुख सचिव व साइबर क्राइम को दे दिए। इनके आधार पर 11 दिसंबर को तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

डोमेन खरीदा, फिर दी धमकी
पूछताछ में सामने आया कि सत्य प्रकाश ने वेबसाइट से हावर्ड डॉट नेट डॉट इन नाम से डोमेन खरीदा। जांच बढ़ी तो ऐसे सुराग मिले, जिनमें सत्य प्रकाश की साजिश सामने आई। साइबर क्राइम थाने की टीम ने उसके घर, कार्यालय में कंप्यूटर, लैपटॉप की जांच शुरू की। इसमें साफ हो गया कि डोमेन सत्य प्रकाश ने ही खरीदा था, जिसका इस्तेमाल उसने अपने कंप्यूटर से किया। मेल आईडी खोला गया तो डोमेन खुला मिला। धमकी वाले मेल में भेजे गए डॉक्यूमेंट की जांच हुई तो उसके सत्य प्रकाश के नाबालिग बेटे की ओर से बनाए जाने की पुष्टि हुई। सोमवार को सत्य प्रकाश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पूछताछ में उसने कहा कि उसे लगा था कि प्रमुख सचिव इतनी छोटी रकम के लिए केस नहीं कराएंगे। उधर, गिरफ्तार तीनों कर्मचारियों की मामले में भूमिका नहीं मिली। साइबर क्राइम थाने की टीम ने इन्हें छुड़ाने के लिए रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक उच्चाधिकारियों से बातचीत कर इसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

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