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दृष्टिबाधा के 80 प्रतिशत मामलों की वजह लापरवाही, केजीएमयू में विश्व दृष्टि दिवस पर गोष्ठी

Fri, 15 Oct 2021 01:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 15 Oct 2021 01:18 AM IST
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irresponsible behavier behind 80 percent eye problems
विश्व में इस समय 285 मिलियन लोग आंख की कम रोशनी से पीड़ित हैं। इनमें से 39 मिलियन लोग दृष्टिबाधित हैं। इन 39 मिलियन लोगों में 90 फीसदी लोेग भारत और अन्य कम आय वाले देशों में निवास करते हैं। दृष्टिबाधा के 80 फीसदी मामलों की वजह लापरवाही है, जबकि इनका इलाज संभव है। केजीएमयू के ऑप्थलमोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अपजित कौर ने यह जानकारी दी। वह विश्व दृष्टि दिवस पर विभाग की ओपीडी में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहीं थीं।
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इस मौके पर कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने कहा कि आंखों का समय पर इलाज जरूरी है। इससे बीमारी को रोका जा सकता है। केजीएमयू में आंखों की ज्यादातर बीमारियों का इलाज संभव है। इसके साथ ही नेत्रदान कर दूसरों की जिंदगी रोशन की जा सकती है। केजीएमयू में कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा है। नेत्र रोग विभाग के डॉ. सिद्धार्थ ने कहा कि कोरोना काल में मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल बढ़ा है। इसका असर आंखों की सेहत पर पड़ा है। बच्चों से लेकर अधिक उम्र के लोगों में आंखों से जुड़ी समस्या देखने को मिली है। सावधानी बरतकर आंखों की समस्याओं में कमी लाई जा सकती है। लगातार मोबाइल का इस्तेमाल करने से बचें।
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