आरटीई में गड़बड़झालाः बंद स्कूलों में बच्चों को दाखिले के लिए भेजा, विभाग ने नहीं किया सत्यापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत दाखिले में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने बच्चों को दाखिले के लिए ऐसे स्कूल आवंटित कर दिए जो महज कागजों पर चल रहे थे या काफी पहले बंद हो चुके हैं। अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने पहुंचे तो आवंटित स्कूल मिले ही नहीं।
करीब 45 अभिभावकों ने शिकायत की तो विभाग की नींद टूटी। अपनी गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के लिए आनन-फानन में सत्यापन कराया तो करीब 550 स्कूूल बंद मिले। इन सभी स्कूलों की मान्यता खत्म कर दी गई। विभागीय गड़बड़ियों का खामियाजा अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है।
लंबे इंतजार के बाद दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने और सूची में नाम आने के बावजूद वे दौड़ से बाहर हो गए हैं। अभिभावकों ने विभाग से स्कूल बदलने की मांग की है।
जानकारी नहीं...
कुछ अभिभावकों ने शिकायत की है कि जिन स्कूलों में उनके बच्चों के नाम आवंटित हैं, वो बंद हैं। उन्होंने स्कूल बदलवाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। विचार चल रहा है। विभाग ने सत्यापन के बाद 550 स्कूलों को अपनी सूची से बाहर किया है। इनमें बच्चे आवंटित हुए या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। - डॉ. अमरकांत सिंह, बीएसए
बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही
4 मामले
केस 1: अंशिका सोनी की बेटी मीनाक्षी का आरटीई के तहत दाखिले के लिए हिंद नगर स्थित राजा मोंटेसरी स्कूल आवंटित हुआ। यह स्कूल पिछले बंद हो चुका है। इस वजह से बच्ची को दाखिला नहीं मिल पाया।
केस 2: हफीजुल हक ने अपने बेटे के दाखिले के लिए मोहम्मद रैय्यान कुरैशी का आरटीई के तहत आवेदन किया। दाखिले के लिए मकबूलगंज स्थित रूचि मोंटेसरी स्कूल आवंटित हुआ। यह स्कूल बंद हो चुका है। अभी तक वे अपने बेटे के दाखिले के लिए भटक रहे हैं।
केस 3: शब्बो ने भी आरटीई के तहत दाखिले के लिए अपनी बेटी जोया का आवेदन किया। दाखिले की सूची में राम विहार स्थित ग्लोरियस पब्लिक स्कूल आंवटित हुआ। इस विद्यालय का कहीं अता पता नहीं है। लिहाजा अभी तक दाखिला नहीं मिला है।
केस 4: चंद्रभानु गुप्त वार्ड निवासी वंदना श्रीवास्तव ने अपनी बेटी अक्क्षरा का प्री प्राइमरी में दाखिले के लिए आरटीई के तहत आवेदन किया था। दाखिले के लिए बच्ची का नाम दयानंद विद्या निकेतन स्कूल अलॉट किया गया, लेकिन यह स्कूल भी अस्तित्व में नहीं है।
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत दाखिले के लिए बच्चों को बंद पड़े स्कूलों में भेजने वाले बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि स्कूलों की सूची फाइनल करने से पहले इनका सत्यापन तक नहीं कराया। विभाग को स्कूलों का सत्यापन कर मैपिंग करनी होती है।
विभाग ने मैपिंग के दौरान ही गड़बड़ियां कीं। विभागीय कर्मियों ने मैपिंग में वे स्कूल भी शामिल कर लिए जो काफी समय से बंद थे। जो स्कूल यू डायस पर थे उनको वैसे ही वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया। कर्मियों ने यह देखने की कोशिश भी नहीं कि ये स्कूल संबंधित वार्ड में संचालित हैं भी की नहीं।
ये गड़बड़ियां भी मिलीं
दाखिले के दौरान जब अभिभावकों ने स्कूल बंद होने की शिकायत की तब विभाग ने दाखिले के बीच ही ऐसे स्कूलों का सत्यापन कराया। बीएसए डॉ. अमरकांत सिंह ने बताया कि 550 स्कूल कागजों पर चलते मिले। सभी को अंतिम नोटिस दिया गया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर इनकी मान्यता खत्म कर दी गई।
दाखिले की सूची जारी होने के बाद कई अन्य स्कूलों के बारे में जानकारी मिली जो अपने पते पर नहीं मिले। त्रिवेणी नगर स्थित धीरेंद्र ने अपनी बेटी का प्री प्राइमरी में दाखिले के लिए आवेदन किया। उनकी बच्ची को एकेडमी स्कूल आवंटित किया गया, लेकिन उस क्षेत्र में इस नाम से कोई स्कूल संचालित होता नहीं पाया।
राकेश गुप्ता के बेटे पार्थ गुप्ता को दाखिले के लिए आलमबाग स्थित नर्सरी स्कूल स्कूल आवंटित हुआ, लेकिन यह स्कूल उस क्षेत्र में नहीं मिला। मुसैहबगंज के मल्लहे टोला वार्ड में स्थित बजरंगी लाल साहू इंटर कॉलेज में कई बच्चों को दाखिले के लिए आवंटित किया गया, लेकिन यह स्कूल भी खोजने पर नहीं मिला। मोहम्मद अजीम के बेटे फहाद सिद्दीकी के दाखिले के लिए रहीम नगर स्थित आदर्श मोंटेसरी स्कूल आवंटित हुआ। पूरे क्षेत्र में यह स्कूल ढूंढने पर नहीं मिला।