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समाज कल्याण विभाग में मृतक आश्रितों की भर्ती में बड़ा खेल, दो कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त, दो के खिलाफ शुरू हुई जांच

Thu, 06 Aug 2020 12:41 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 06 Aug 2020 12:41 PM IST
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Irregularities in recruitment of deceased dependents in social welfare department
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
समाज कल्याण विभाग में मृतक आश्रितों को नौकरी देने में बड़ा खेल सामने आया है। पिछले कुछ वर्षों में मृतक आश्रित के तौर पर कई अपात्र लोगों को नौकरी दे दी गई। मामला पकड़ में आने पर दो कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जबकि दो अन्य के खिलाफ जांच बैठा दी गई है।
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गलत नियुक्तियां देने के आरोप में संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से भी जवाब तलब किया गया है। समाज कल्याण विभाग में मृतक आश्रित के रूप में प्रतिमा सिंह को पर्यवेक्षक के पद पर वर्ष 2016 में नियुक्ति दी गई। उनके पिता इंद्र बहादुर सिंह एडीओ समाज कल्याण के पद पर तैनात थे, जिनकी सेवा के दौरान ही मौत हो गई थी।
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प्रतिमा की मां मालती सिंह बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं। नियम है कि यदि मां-बाप दोनों सरकारी सेवा में हैं और एक की मृत्यु हो जाती है तो मृतक आश्रित कोटे का लाभ नहीं मिलेगा। इसलिए प्रतिमा सिंह को नौकरी नहीं दी जा सकती थी। जांच में मामला सही पाए जाने पर प्रतिमा को बर्खास्त कर दिया गया है।
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उनकी मां ने सरकारी सेवा में न होने का झूठा एफिडेविट दिया था। उनके खिलाफ एफआईआर के आदेश अमेठी पुलिस को दे दिए गए हैं। इस मामले में तत्कालीन उप निदेशक नीरू सिंह को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी भाईलाल यादव के सेवानिवृत्त हो जाने के कारण शासन से उनके खिलाफ कार्यवाही की अनुमति मांगी गई है। 
 

वेतन की रिकवरी पर विचार 

इसी तरह के एक अन्य मामले में सहायक विकास अधिकारी, समाज कल्याण शिवशंकर को वर्ष 1994 से बर्खास्त किया गया था। उनकी लंबी गैरहाजिरी के कारण बर्खास्तगी का यह आदेश वर्ष 2000 में जारी हुआ। जब शिवशंकर की मृत्यु हुई, तो उनके पुत्र हेमंत कुमार ने मृतक आश्रित के रूप में नौकरी मांगी, जिसे अधिकारियों की मिलीभगत से स्वीकार कर लिया गया।

हेमंत को कनिष्ठ लिपिक के पद पर तैनाती दे दी गई, जबकि बर्खास्त कर्मचारी के मामले में मृतक आश्रित कोटे का कोई दावा नहीं बनता है। मामला सही पाए जाने पर हेमंत कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इस मामले में उन्नाव के तत्कालीन अपर जिला विकास अधिकारी, समाज कल्याण राकेश रमन और लेखाकार शत्रुहन सिंह को उत्तरदायी ठहराया गया है। 

समाज कल्याण निदेशालय में ही तैनात दो और बाबुओं के खिलाफ भी जांच उपनिदेशक जे. राम को सौंपी गई है। इनमें से एक को मां के स्थान पर और दूसरे को पिता के स्थान पर नौकरी दी गई है, जबकि दोनों ही मामलों में माता-पिता, दोनों ही सरकारी सेवा में कार्यरत थे। सूत्रों का कहना है कि अगर मृतक आश्रित कोटे में नौकरी कर रहे सभी कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच करा ली जाए, तो और भी घपले सामने आ सकते हैं।

गलत ढंग से मृतक आश्रित कोटे में नौकरी लेने पर दो कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। उन्हें दिए गए वेतन की रिकवरी के लिए शासन का अभिमत मांगा जा रहा है।  - बालकृष्ण त्रिपाठी, निदेशक, समाज कल्याण   
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